विजय सहनी हत्याकांड में अशोक यादव को उम्रकैद, एक लाख रुपये जुर्माना; धारा 201 में भी मिली सजा

Shreya Raj
पश्चिम चंपारण के विजय सहनी हत्याकांड में दोषी अशोक यादव को सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस अधिकारियों और अधिवक्ता के साथ आरोपी की तस्वीर।

NEWS PR डेस्क: पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में चर्चित विजय सहनी हत्याकांड में अदालत ने शुक्रवार को एक और दोषसिद्ध अभियुक्त अशोक यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने अशोक यादव को हत्या और साक्ष्य छिपाने के मामले में दोषी करार देते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने उस पर कुल एक लाख 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

हत्या के मामले में उम्रकैद, साक्ष्य छिपाने पर सात वर्ष की सजा

अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत अशोक यादव को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा दी वहीं, धारा 201 के तहत सात वर्ष के कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड का आदेश दिया गया। जुर्माना जमा नहीं करने पर दोनों धाराओं में अलग-अलग छह महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

अदालत ने जेल में बिताई गई निरोध अवधि को सजा की अवधि में समायोजित करने का भी आदेश दिया है।

पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने विजय को बुलाया गया था

यह मामला रामनगर थाना कांड संख्या 189/2022 से जुड़ा है। घटना एक मई 2022 की है। मृतक विजय सहनी की पत्नी आशा देवी ने चार मई को रामनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

अभियोजन के अनुसार, विजय सहनी को पोखरा विवाद सुलझाने के बहाने फोन कर बुलाया गया था। इसके बाद वह बाइक से घर से निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने काफी खोजबीन की और जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो पुलिस को इसकी सूचना दी गई।

घटना के करीब सात दिन बाद आरोपी महफूज अंसारी और तेतर राम की निशानदेही पर गोवर्धना जंगल में एक गड्ढे से विजय सहनी का शव बरामद किया गया। शव की पहचान अंगूठी और घड़ी के आधार पर की गई। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।

10 गवाहों और कई अहम साक्ष्यों को कोर्ट में किया गया पेश

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 10 गवाहों को पेश किया। इनमें मृतक की पत्नी आशा देवी, बेटे राहुल कुमार सहनी, चिकित्सक डॉ. विनय कुमार और अनुसंधानकर्ता संतोष कुमार जायसवाल प्रमुख रहे।

अदालत के समक्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट, कॉल डिटेल, मोबाइल फोन, बाइक और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। इन्हीं साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने अशोक यादव को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।

पहले पांच अन्य दोषियों को भी मिल चुकी है उम्रकैद

इससे पहले पांच सितंबर को इसी हत्याकांड में महफूज अंसारी, राजकिशोर महतो, तेतर राम उर्फ साधु, श्री मुशहर और गीता देवी को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

एपीपी जितेंद्र भारती के अनुसार, संपत्ति के लालच में गीता देवी ने अपने भाई विजय सहनी की हत्या की साजिश रची थी। इस मामले में अदालत के लगातार फैसलों के बाद मृतक के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

पश्चिम चंपारण से रिपोर्टर: मोहम्मद इम्तिआज़

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