सरकारी दर पर खाद नहीं मिलने से खुदरा विक्रेताओं ने रोका उठाव, थोक विक्रेताओं पर मनमानी का आरोप

Shreya Raj
पश्चिम चंपारण के बगहा में निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने की मांग को लेकर एकजुट खुदरा उर्वरक विक्रेता।

NEWS PR डेस्क: पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में निर्धारित दर पर खाद नहीं मिलने से खुदरा उर्वरक विक्रेताओं में नाराजगी है। थोक विक्रेताओं द्वारा अधिक कीमत पर डीएपी और यूरिया उपलब्ध कराए जाने के विरोध में बगहा-1 प्रखंड के खाद विक्रेता एकजुट हो गए हैं। शुक्रवार को करीब पांच दर्जन से अधिक खुदरा विक्रेताओं ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी को आवेदन देकर अनिश्चितकाल तक उर्वरक का उठाव नहीं करने की जानकारी दी।

थोक में महंगी खाद मिलने से विक्रेताओं की परेशानी बढ़ी

खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि थोक विक्रेताओं द्वारा यूरिया और डीएपी निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही है। विक्रेताओं के अनुसार, उन्हें थोक में यूरिया 280 से 320 रुपये में मिल रही है वहीं, डीएपी की कीमत 1600 से 1800 रुपये तक वसूली जा रही है।

विक्रेताओं ने बताया कि सरकार की ओर से यूरिया की निर्धारित दर 245 रुपये और डीएपी की कीमत 1250 रुपये तय की गई है। ऐसे में जब उन्हें ही खाद महंगी दर पर मिलेगी, तो किसानों को सरकारी निर्धारित कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा। इसी समस्या के विरोध में उन्होंने खाद का उठाव रोकने का निर्णय लिया है।

सरकारी दर पर खाद उपलब्ध कराने की मांग

खुदरा उर्वरक विक्रेताओं ने थोक विक्रेताओं से सरकारी निर्धारित दर पर ही यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अधिक कीमत पर खाद खरीदने के बाद निर्धारित दर पर बिक्री करने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इससे किसानों को भी परेशानी होती है और खाद की बिक्री व्यवस्था प्रभावित होती है।

विक्रेताओं ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी को आवेदन देकर अपनी समस्या से अवगत कराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक वे उर्वरक का उठाव नहीं करेंगे।

इस संबंध में बीडीओ प्रदीप कुमार ने दूरभाष पर बताया कि मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को विक्रेताओं की समस्या से अवगत कराकर आवश्यक कार्रवाई की दिशा में पहल की जाएगी।

इस दौरान करीब पांच दर्जन खाद विक्रेता मौजूद रहे। विक्रेताओं के सामूहिक रूप से उठाव रोकने के निर्णय से क्षेत्र में खाद की आपूर्ति और किसानों को मिलने वाले उर्वरक को लेकर स्थिति पर असर पड़ने की संभावना है।

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