भागलपुर में शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की 150वीं जयंती पर भव्य आयोजन, गांगुली बाड़ी में साहित्यकार को दी श्रद्धांजलि

Shreya Raj
शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की 150वीं जयंती पर गांगुली बाड़ी में सजे उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते साहित्यप्रेमी।

NEWS PR डेस्क: भागलपुर में महान साहित्यकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की 150वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। माणिक सरकार स्थित उनके ननिहाल गांगुली बाड़ी में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकार के जीवन, व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान पर चर्चा हुई। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए और शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया गया।

गांगुली बाड़ी में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन

कार्यक्रम का आयोजन बिहार बंगाली समिति, बरारी शाखा, भाषा-कृष्टि मिलन मेला और शरत द्वार निर्माण समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन शिक्षाविद् राजीव कांत मिश्रा, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अंकित कुमार समेत अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस मौके पर वक्ताओं ने शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन और साहित्यिक सफर पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शरतचंद्र का साहित्य मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक यथार्थ और आम लोगों के जीवन से गहराई से जुड़ा रहा है। उनकी रचनाओं में समाज के विभिन्न वर्गों की भावनाओं और संघर्षों को प्रमुखता से स्थान मिला।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

जयंती समारोह के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। पैमी अम्बस्ट, श्वेता सुमन, संगीता दास और करण सिंह ने गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और माहौल को साहित्यिक रंग के साथ सांस्कृतिक रूप भी दिया।

इस अवसर पर शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। उनके ममेरे भाई के पुत्र शांतनु गांगुली, उज्ज्वल गांगुली, अपर्णा गांगुली, माला गांगुली, समुज्ज्वल गांगुली और उनकी पुत्री रेमी गांगुली को चादर ओढ़ाकर सम्मान दिया गया।

शरत द्वार पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन

मुख्य कार्यक्रम के बाद सभी सदस्य शरत द्वार पहुंचे। यहां शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण किया गया और दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शंखध्वनि के बीच साहित्यकार की स्मृति को नमन किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम का संचालन तापस घोष ने किया। लोगों ने शरतचंद्र की साहित्यिक विरासत और उनके मानवीय सरोकारों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि उनकी रचनाएं आज भी समाज और मानवीय संवेदनाओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

भागलपुर से रिपोर्टर: श्यामानंद सिंह

Share This Article