पटना/मनेर: बिहार के पटना जिले के दानापुर अनुमंडल अंतर्गत मनेर से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। मनेर नगर परिषद क्षेत्र के रामघाट में मूर्ति विसर्जन के दौरान पानी में डूबने से संजीत कुमार की मौत हो गई। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे युवक को रेफर किए जाने के बाद भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई, जबकि अस्पताल में दो एंबुलेंस मौजूद थीं।
मूर्ति विसर्जन के दौरान पानी में डूबा युवक
जानकारी के अनुसार, मनेर नगर परिषद क्षेत्र के रामघाट में मूर्ति विसर्जन के दौरान संजीत कुमार पानी में डूब गया। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने युवक को बचाने के लिए काफी मशक्कत की। इसके बाद उसे मोटरसाइकिल से इलाज के लिए मनेर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद युवक को बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने की बात सामने आई। इसी दौरान एंबुलेंस नहीं मिलने को लेकर विवाद और सवाल खड़े हो गए।
दो एंबुलेंस होने के बावजूद नहीं मिली सुविधा
मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में दो-दो एंबुलेंस मौजूद होने के बावजूद संजीत कुमार को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। आरोप है कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर सुविधा देने से इनकार किया गया।
इसके बाद युवक को मोटरसाइकिल से दूसरे अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई। इस दौरान उसकी हालत बिगड़ गई। बाद में निजी अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस की गाड़ी से ले जाने की बात आई सामने
मौके पर मौजूद पुलिस पदाधिकारी के अनुसार, अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद युवक को आगे इलाज के लिए पुलिस की गाड़ी से ले जाया गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है और वे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
मृतक की पहचान संजीत कुमार के रूप में
मृतक की पहचान मनेर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर एक निवासी संजीत कुमार के रूप में हुई है। उनके पिता का नाम सुरेश पासवान बताया गया है।
अस्पताल प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सरकारी अस्पताल की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं मिलतीं, तो शायद युवक की जान बचाने की संभावना बेहतर हो सकती थी।
हालांकि, एंबुलेंस की अनुपलब्धता या इलाज में देरी ही युवक की मौत का कारण बनी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष और दोनों एंबुलेंस की वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट होना बाकी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीज को समय पर एंबुलेंस क्यों नहीं मिली? क्या एंबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं थी, या आपातकालीन सेवाओं के संचालन में कोई चूक हुई? इन सवालों पर अस्पताल प्रशासन का जवाब और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।पटना से पशुपतिनाथ शर्मा की रिपोर्ट