बिहार में बैंकों के प्रदर्शन की होगी रैंकिंग, 4.95 लाख करोड़ का साख योजना लक्ष्य

Rashmi Tiwari

NEWS PR डेस्क :विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को पुराना सचिवालय स्थित मुख्य सभाकक्ष में उच्च स्तरीय समिति की तृतीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के समग्र बैंकिंग प्रदर्शन, वार्षिक साख योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति, साख जमा अनुपात की वर्तमान स्थिति तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत ऋण प्रवाह की बिंदुवार और गहन समीक्षा की गई।

बैठक की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि बिहार के इतिहास में यह पहली बार है जब विकास आयुक्त द्वारा राज्य में कार्यरत बैंकों के कार्य-प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए 100 अंकों के एक वैज्ञानिक ‘मापन सूचकांक’ को लागू किया गया है। इस नए पारदर्शी सिस्टम में विभिन्न मापदंडों के लिए अंक निर्धारित कर रैंकिंग व स्कोरिंग तय की गई है। इसके साथ ही इस बार राज्य सरकार द्वारा समीक्षा के दायरे को और व्यापक बनाते हुए चार नई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं को भी इस ऋण निगरानी तंत्र में मजबूती से जोड़ा गया है, जिससे वित्तीय प्रवाह की और अधिक सटीक ट्रैकिंग संभव हो सकेगी।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार की वार्षिक साख योजना का आकार बढ़ाकर ₹4,95,000 करोड़ का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह राशि इस वित्तीय वर्ष के लिए राज्य के करीब ₹1,25,000 करोड़ के प्लान बजट से लगभग चार गुना अधिक है, जो राज्य की आर्थिक विकास दर (GSDP) और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन (Job Creation) को एक मजबूत गति प्रदान करेगी। इस निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध सितंबर तिमाही (30.09.2026 तक) में राज्य ने ₹1,89,343.52 करोड़ (38.25%) की मजबूत उपलब्धि हासिल कर ली है। विकास आयुक्त ने रेखांकित किया कि यह प्रगति पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की इसी छमाही की तुलना में ₹46,228.29 करोड़ अधिक है, जो बिहार में निवेश और आर्थिक गतिविधियों में आई भारी तेजी को प्रमाणित करती है। क्षेत्रवार प्रगति के अंतर्गत एमएसएमई क्षेत्र ने सर्वाधिक उत्साहजनक प्रदर्शन करते हुए ₹1,59,632 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹84,091.21 करोड़ (52.68%) की बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कृषि क्षेत्र में ₹1,57,015 करोड़ के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले ₹43,967.17 करोड़ (28.00%) का ऋण प्रवाह सुनिश्चित किया गया है तथा कुल प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में ₹3,55,532 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹1,30,619.00 करोड़ (36.74%) का ऋण वितरित किया जा चुका है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में बिहार ने पहली बार 60.21 प्रतिशत का ऐतिहासिक साख जमा अनुपात हासिल किया था, और यह सकारात्मक गति इस वित्तीय वर्ष में भी बरकरार है। 30 सितंबर 2026 तक राज्य का समग्र CD Ratio 60.17 प्रतिशत पर बना हुआ है। वर्तमान में राज्य में कुल जमा राशि बढ़कर ₹6,49,225 करोड़ तथा कुल बकाया साख ₹3,90,655 करोड़ के नए स्तर पर पहुंच गई है। पिछले वर्ष की तुलना में जमा राशि में ₹33,797 करोड़ तथा साख (ऋण प्रवाह) में ₹20,092 करोड़ की स्वस्थ वृद्धि दर्ज की गई है।

विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत ऋण प्रवाह की समीक्षा करते हुए विकास आयुक्त ने किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन को और अधिक तीव्र बनाने का निर्देश दिया। आंकड़ों के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड के तहत कुल 7,37,906 खातों के माध्यम से किसानों को ₹8,344.70 करोड़ का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिसमें 7,12,383 खातों का नवीनीकरण शामिल है। इसके अतिरिक्त पशुपालन के क्षेत्र में ₹605.01 करोड़ तथा मत्स्य पालन में ₹11.12 करोड़ का ऋण दिया गया है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में राज्य में कुल 13,911 आवेदन स्वीकृत कर ₹28,451.21 लाख की राशि को गति दी गई है। वहीं रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों के लिए पीएम स्वनिधि योजना के तहत कुल 2,17,731 आवेदन स्वीकृत कर ₹2,09,959 लाख का ऋण वितरित किया जा चुका है। पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना व विश्वकर्मा योजना के माध्यम से क्रमशः 2,748 उद्योगों और 28,625 से अधिक शिल्पकारों को वित्तीय मुख्यधारा से जोड़ा गया है।

100 अंकों के प्राप्तांकों वाले मापन सूचकांक के आधार पर बैंकों को तीन श्रेणियों (ज़ोन) में वर्गीकृत किया गया है:

  • ग्रीन ज़ोन (50 या अधिक अंक – उत्कृष्ट प्रदर्शन): इस सूची में IDFC फर्स्ट बैंक (74 अंक) शीर्ष पर है। इसके साथ जम्मू एंड कश्मीर बैंक (68), आरबीएल बैंक (68), एचडीएफसी बैंक (65), बैंक ऑफ बड़ौदा (64), उज्जिवन स्मॉल Finance बैंक (63), पंजाब एंड सिंध बैंक (58), बिहार ग्रामीण बैंक (57), बैंक ऑफ महाराष्ट्र (53), एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (53) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (52) शामिल हैं।
  • येलो ज़ोन (40 से 50 के बीच अंक – मध्यम प्रदर्शन): इस श्रेणी में आईसीआईसीआई बैंक (47), बैंक ऑफ इंडिया (47), पंजाब नेशनल बैंक (45), एक्सिस बैंक (42), यस बैंक (42), यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (42) और इंडियन बैंक (40) शामिल हैं।
  • रेड ज़ोन (40 से कम अंक – अपेक्षाकृत कम प्रदर्शन): इस श्रेणी में इंडियन ओवरसीज बैंक (37), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (37), यूको बैंक (35), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (32), केनरा बैंक (27), आईडीबीआई बैंक (26), बंधन बैंक (26), कोटक महिंद्रा बैंक (26) तथा स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (26) सहित कुछ अन्य बैंक शामिल हैं।
    विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने राज्य के औसत (38.25%) से कम कार्य-प्रदर्शन करने वाले तथा रेड ज़ोन में शामिल प्रमुख बैंकों (जैसे SBI, PNB, CBI, BOI, UCO और IDBI आदि) को अपनी साख प्रक्रिया में तेजी लाने और वित्तीय वर्ष के बचे हुए महीनों में साख योजना के लक्ष्यों को मिशन मोड में पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने बड़े बैंकों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जिन प्रमुख बैंकों के पास राज्य की भारी जमा पूंजी मौजूद है, उनका साख जमा अनुपात (CD Ratio) 50% से कम होना एक गंभीर विषय है। इन बैंकों को बिहार की जनता के पैसे को बिहार के ही कृषि, MSME, स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ऋण के माध्यम से वापस निवेश करना होगा ताकि राज्य की आर्थिक प्रगति को और अधिक संवेग मिल सके। उन्होंने बैंकों को स्पष्ट हिदायत दी कि वे ऋण आवेदनों की पेंडेंसी को जल्द से जल्द समाप्त करें और विशेष रूप से केसीसी, पीएम विश्वकर्मा तथा रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की योजनाओं में लोन रिजेक्शन दर को न्यूनतम स्तर पर लाएं।

इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के मुख्य संयोजक, विभिन्न सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ महाप्रबंधक एवं राज्य सरकार के संबंधित विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाग लिया।

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