ख़ाकी- द -बिहार चैप्टर के रियल हीरो आईपीएस अमित लोढ़ा ने फ़िल्म में अपने ईमानदार साबित किया है लेकिन पटना हाईकोर्ट ने अमित लोढ़ा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप को प्रथम दृष्टा में सही पाते हुए याचिका को ख़ारिज कर दिया है । जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने एसवीयू को आदेश दिया है की 6 माह के अंदर जांच पुरी कर निचली अदालत में रिपोर्ट करें । 22 जनवरी 24 को आदेश पारित होने के बाद आईपीएस, आईजी अमित लोढ़ा की मुश्किलें बढ़ गयी है ।
अमित लोढ़ा ने सरकारी सेवा में रहते हुए बिना अनुमति के अपने पद को दुरूपयोग ही नहीं किया बल्कि बिहार के छवि को देश – दुनिया में ख़राब करने का काम किया है । हाल में जेल से छूटे नवादा के अशोक महतो भी सोशल मीडिया पर यह कहते दिखे है की मेरी हत्या (इंकाउंटर) के लिए अमित लोढ़ा ने 55 लाख रूपये में सौदा किया था. अमित लोढ़ा के खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई करेंगे । मालूम हो की अशोक महतो जिस वर्ग से आते हैं उसी की सरकार है । सरकार भ्रष्टाचार के मामले में किसी से कोई समझौता नहीं करती है ।
अमित लोढ़ा के खिलाफ एसवीयू ने आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने को लेकर एफ़आइआर 17/2022 दर्ज किया था । पुलिस मुख्यालय के आदेश से अमित लोढ़ा पर लगे आरोप की जांच तत्कालीन एडीजी अनिल किशोर यादव ने किया था । जिसकी एक विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपा था एवं कार्रवाई की अनुशंसा किया था। फ़िलहाल अमित लोढ़ा पुलिस मुख्यालय में आईजी एससीआरबी है ।