पटना : मुस्लिम वर्ग के लिए कुरान महाग्रंथ है। वैसे तो इसको मूल रुप से फारसी में लिपिबद्ध पायी जाती है। बाद में इसका अनुवाद उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी सहित कई अन्य भाषाओं में की गई है। सभी को पढ़ने में सहुलियत हो इसको लेकर बिहार के बक्सर जिले डुमरांव के रहने वाले मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने कुरान का अनुवाद भोजपुरी में करना शुरू कर दिया है। कुरान को भोजपुरी करने के पीछे मुरली मनोहर श्रीवास्तव का उद्देश्य है कि कुरान की आयतों को हर लोग आसानी से भोजपुरी भाषा में भी समझ सकें। मुरली कहते हैं कि कुरान का अनुवाद देश की लगभग सभी भाषाओं में हो चुकी है, भोजपुरी में कुरान अभी तक नहीं अनुवादित है, इसलिए इन्होंने यह कोशिश शुरु की है।
मुरली मनोहर श्रीवास्तव के मुताबिक, बिहार के अलावा भोजपुरी यूपी, मध्य प्रदेश, झारखंड सहित कई राज्यों में बोली और समझी तो जाती ही है, इसके अलावे मॉरीशस, वियतनाम, फिजी, त्रिनिडाड, गुआयना सहित कई अन्य देशों में भी भोजपुरी काफी लोकप्रिय है, वहां पढ़ी और समझी जाती है। ऐसे में अब तक कुरान का अनुवाद भोजपुरी में नहीं हुआ था, इसलिए उन्होंने कुरान को भोजपुरी में लिखना शुरू कर दिया है। श्री मुरली कहते हैं अगली ईद तक भोजपुरी में कुरान प्रकाशित करने के लिए पूरी कोशिश की जाएगी।
भोजपुरी में कुरान लिखने से पहले मुरली मनोहर श्रीवास्तव काफी डरे हुए थे लेकिन, उन्होंने हिम्मत किया कि किसी भी तरह से इस किताब को भोजपुरी में अनुवादित करेंगे। इस दौरान उन्होंने मुस्लिम धर्म गुरुओं से मुलाकात की, साथ ही कई मुसलमान लेखकों से भी इसकी चर्चा की। कुछ मुस्लिम मित्रों ने इनका उत्साहवर्धन किया, जिसके बाद भोजपुरी में कुरान का लेखन शुरू कर पाए। ऐसा नहीं कि मुरली श्रीवास्तव सिर्फ रोजा रखकर मुस्लिम धर्म का पालन करते हैं बल्कि लोक आस्था के सबसे महापर्व छठ भी बड़ी शिद्दत के साथ करते हैं। चार दिनों के इस अनुष्ठान को भी वो काफी नियम और शुद्धता से करते हैं। सभी धर्मों में आस्था रखने वाले हिंदु मुरली मनोहर श्रीवास्तव गंगा-जमनी तहजीब पर लगातार काम करने वाले अपनी पहली किताब काफी शोध करके प्रसिद्ध शहनाई वादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के ऊपर लिखी थी, जो काफी लोकप्रिय हुई थी। इसके बाद वीर कुंवर सिंह की प्रेम कथा लिखकर विवादों में आए थे। वीर कुंवर सिंह के समर्थकों ने विरोध उत्पन्न कर दिया था।