NEWSPR डेस्क। कैमूर के विद्यालय की जांच करने के लिए राजद विधायक विद्यालय पहुंची तो स्थिति देख हैरान रह गई। विधायक विद्यालय के वर्ग 6 में प्रवेश की तो पढ़ाई के समय क्लास खाली था शिक्षक नहीं थे, जहां बच्चों से पूछा कौन सा विषय है। बच्चों ने कहा इंग्लिश की घंटी है तो उन्होंने बच्चों को शिक्षक बनकर टेंस पढ़ाना शुरू कर दिया। जिसके बाद बच्चों के सामने ही शिक्षकों की क्लास लगा दी।
इसके साथ ही मध्यान भोजन का भी उन्होंने जांच किया जो पूरी तरह गुणवत्ता विहीन पाया गया। बच्चों के साथ बैठकर विधायक मध्यान भोजन का स्वाद चखा और मध्यान भोजन सप्लाई करने वाले एनजीओ के खिलाफ विधानसभा में आवाज उठाने की भी बात कही। विधायक ने कहा नीतीश सरकार की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट है कथनी और करनी में काफी अंतर दिखाई पड़ता है।
दरअसल मोहनिया की राजद विधायक संगीता कुमारी मोहनिया प्रखंड के राजकीय बुनियादी विद्यालय चौरसिया में जांच करने के लिए पहुंच गई। जब क्लास छह के रूम में गई तो पता चला कि अंग्रेजी का घंटी है और शिक्षक क्लास छोड़कर बाहर हैं, फिर विधायक ही शिक्षक बनकर बच्चों को अंग्रेजी विषय में टेंस पढ़ाने लगी और बच्चों से फीडबैक भी ली। जहां बच्चों ने उनके बताए गए वाक्यों का बखूबी जवाब दिया।
जब उन्होंने पढ़ा लिया तो शिक्षक क्लास रूम में पहुंची जहां विधायक ने बच्चों के सामने ही शिक्षक का क्लास लेना शुरू कर दिया। वही मध्यान भोजन के समय पर बच्चों के साथ विधायक मध्यान भोजन खाने के लिए बच्चों के बीच ही कतार में बैठ गई। जहां चावल में विधायक ने ईंट कंकड़ मिलने की शिकायत की तो चावल के साथ मिलने वाला चना का छोला सिर्फ पानी नजर आया। मध्यान भोजन विद्यालय में एनजीओ के द्वारा सप्लाई होता है इसके खिलाफ विधायक ने विधानसभा में सवाल उठाने की बात बताई और शिक्षकों को बच्चों के भविष्य खिलवाड़ नहीं करने का हिदायत भी दिया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य बताते हैं कि मोहनिया की राजद विधायक संगीता कुमारी विद्यालय में जांच के लिए पहुंची थी । जैसे वह क्लास में पहुंची उस समय शिक्षक किसी कार्य से क्लास से बाहर निकली थी और फिर थोड़ी ही समय में शिक्षक अपने क्लास में पहुंच गई। जब तक शिक्षक नहीं थी तो विधायक ने बच्चों को अंग्रेजी में टेंस पढ़ाया। विद्यालय में मध्यान भोजन एनजीओ के द्वारा भेजा जाता है।
विधायक संगीता कुमारी ने बताया मैं बुनियादी विद्यालय चौरसिया का औचक निरीक्षण किया। जब मैं स्कूल में प्रवेश की तो बच्चे क्लास में बैठे थे शिक्षक नहीं थे। पता करने पर पता चला कि अंग्रेजी में टेंस पढ़ाने की घंटी है तो मैंने बच्चों को टेंस के बारे में पढ़ाना शुरू किया। बच्चों के पढ़ाने के बाद मैंने टीचर को बुलाया और उनको फटकारा भी , पढ़ाई को लेकर काफी कमियां पाई गई है। विद्यालय में माननीय मुख्यमंत्री जी जो क्वालिटी ऑफ एजुकेशन की बात करते हैं इसकी पोल खूलती हुई यहां नजर आई मुझे ।
कैमूर/भभुआ से ब्रजेश दुबे की रिपोर्ट