NEWS PR डेस्क: बिहार में अपने खास स्वाद के लिए मशहूर मटन, खासकर चंपारण स्टाइल, एक बार फिर चर्चा में है—लेकिन इस बार वजह स्वाद नहीं, बल्कि नई सरकारी गाइडलाइन है। राज्य सरकार ने मांस बिक्री को लेकर वर्षों पुराने नियमों में बदलाव करते हुए सख्त व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस कदम के बाद मटन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है, जिससे मटन प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है।
मटन प्रेमियों के लिए झटका:
‘क्लीन सिटी’ और स्वच्छता अभियान के तहत सरकार ने नया ‘मीट कानून’ तैयार किया है। इसके लागू होते ही सड़क किनारे खुले में मांस बेचने पर रोक लग जाएगी। अब बिना लाइसेंस के कोई भी मांस दुकान संचालित नहीं कर सकेगा। दुकानों को साफ-सफाई के मानकों का पालन करना होगा और मांस को खुले में लटकाने की अनुमति नहीं होगी।
सरकार के इस फैसले से जहां आम ग्राहकों को महंगाई का डर सता रहा है, वहीं कारोबारियों में भी हलचल मच गई है। व्यापारियों का कहना है कि नए नियमों के तहत लाइसेंस फीस, दुकान को कवर करने (ब्लैक कर्टन/शीशा) और अन्य मानकों को पूरा करने में अतिरिक्त खर्च आएगा, जिसका असर सीधे कीमतों पर पड़ेगा।
होली से पहले बड़ा असर:
होली से पहले इस फैसले ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। आमतौर पर त्योहार के समय मटन की मांग बढ़ने से दाम ऊपर जाते हैं, लेकिन इस बार नई व्यवस्था के कारण पूरे साल कीमतें ऊंची रहने की संभावना जताई जा रही है।
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने दरभंगा दौरे के दौरान स्पष्ट किया कि खुले में मांस बिक्री की अनुमति नहीं होगी और नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी दुकानदारों के लिए वैध लाइसेंस लेना अनिवार्य किया जाएगा।
पूरे बिहार में लागू होगी व्यवस्था:
दरभंगा में प्रशासन ने इस फैसले पर अमल शुरू कर दिया है और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। वैध लाइसेंसधारी दुकानों को तय स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा, जबकि अवैध रूप से कारोबार करने वालों पर सख्ती होगी।
सरकार का तर्क है कि यह कदम स्वच्छता, जनस्वास्थ्य और शहरी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, व्यापारियों का मानना है कि इससे सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और कीमतों में उछाल आ सकता है।
कितनी बढ़ सकती है कीमत ?
फिलहाल पटना और अन्य प्रमुख शहरों में मटन की कीमत ₹750 से ₹800 प्रति किलो के बीच है। लेकिन नए नियमों के तहत अतिरिक्त खर्च जुड़ने से प्रति किलो ₹50 से ₹100 तक की बढ़ोतरी संभव है। वहीं होली के दौरान मांग बढ़ने पर कीमत ₹1,000 से ₹1,200 प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार कब और कैसे इस नई गाइडलाइन को पूरे राज्य में लागू करती है, और इसका आम लोगों की जेब पर कितना असर पड़ता है।