NEWS PR डेस्क: बिहार में हालिया राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के भीतर गहरी सियासी हलचल पैदा कर दी है। महागठबंधन की अप्रत्याशित हार के बाद पार्टी के विधायक ही प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है।
विवाद के केंद्र में आए प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी और गठबंधन को नुकसान पहुंचाने वाले विधायकों को आत्ममंथन करना चाहिए। उनका कहना है कि सभी विधायकों से संपर्क करने की कोशिश की गई थी, लेकिन कुछ से मुलाकात संभव नहीं हो सकी।
राजेश राम ने यह भी स्पष्ट किया कि समन्वय की कमी के आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि विधायकों को कई बार फोन और संदेश भेजे गए, यहां तक कि उनके आवास तक भी जाया गया। उनके मुताबिक, राजनीति में पद से ज्यादा प्रतिष्ठा अहम होती है और इस तरह के आरोप पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
दरअसल, बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर एनडीए के क्लीन स्वीप में कांग्रेस के तीन विधायकों की गैरहाजिरी निर्णायक साबित हुई। इसके चलते महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्रधारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
मतदान से अनुपस्थित रहने वाले वाल्मीकिनगर के सुरेंद्र प्रसाद, फारबिसगंज के मनोज विश्वास और मनिहारी के मनोहर सिंह के खिलाफ प्रदेश नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि पूरे मामले की रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को भेज दी गई है। मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को स्थिति से अवगत कराते हुए संबंधित विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।