NEWS PR डेस्क : पति-पत्नी का रिश्ता दुनिया के सबसे गहरे और खास रिश्तों में माना जाता है। यह सिर्फ दो लोगों का साथ नहीं होता, बल्कि प्यार, भरोसे और समर्पण की मजबूत नींव पर टिका होता है। इस रिश्ते की सच्ची मिसाल धनबाद मुख्यालय से करीब 6 किमी दूर स्थित श्रमिक नगरी भूली बी-ब्लॉक के इंद्रपाल सिंह ने पेश की है।
आमतौर पर शादी के बाद हर दंपती अपने नए जीवन और भविष्य के सपनों को संवारने में लग जाता है। लेकिन इंद्रपाल सिंह के लिए शादी के महज दो महीने बाद ही एक बड़ा सदमा सामने आ गया। उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी सतबिंदर कौर की दोनों किडनियां खराब हो गई हैं।
कठिन परिस्थितियों में जहां अक्सर लोग हिम्मत हार जाते हैं, वहीं धनबाद के इंद्रपाल सिंह ने धैर्य और साहस का परिचय दिया। उन्होंने सिर्फ हिम्मत ही नहीं दिखाई, बल्कि अपनी एक किडनी दान कर पत्नी सतबिंदर कौर की जान बचाई। पति के रूप में उनके इस समर्पण की हर कोई सराहना कर रहा है। आज किडनी ट्रांसप्लांट के बाद दोनों स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
2018 में हुई शादी, 2022 में हुआ किडनी ट्रांसप्लांट
इंद्रपाल सिंह और सतबिंदर कौर की शादी अगस्त 2018 में हुई थी। शादी के कुछ ही समय बाद सतबिंदर की तबीयत लगातार खराब रहने लगी। इसके बाद डॉक्टरों से जांच और इलाज शुरू कराया गया। जांच में सामने आया कि सतबिंदर की दोनों किडनियां काम करना बंद कर चुकी हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि अब उन्हें बचाने का एकमात्र विकल्प किडनी ट्रांसप्लांट ही है। लेकिन इलाज के लिए पैसों की बड़ी समस्या सामने आ गई। बीमारी के कारण सतबिंदर को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी और उनकी देखभाल के लिए इंद्रपाल को भी काम छोड़ना पड़ा।
इस कठिन समय में सतबिंदर के मायके पक्ष के लोग भी निराश हो गए और कई लोगों ने साथ छोड़ दिया। यहां तक कि दूसरी शादी करने की सलाह भी दी गई। लेकिन इंद्रपाल ने हार नहीं मानी। उनके पिता, जो बीसीसीएल में कर्मचारी हैं, ने भी आर्थिक मदद की और किसी तरह पैसे जुटाए गए। आखिरकार अगस्त 2022 में किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कर दिया गया।
धनबाद में किडनी रोगियों की बड़ी संख्या
करीब 32 लाख की आबादी वाले धनबाद जिले में सरकारी अस्पतालों में एक भी नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी रोग विशेषज्ञ) उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अनुमान के मुताबिक जिले में करीब 6 हजार लोग किडनी से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें से लगभग 1800 मरीज गंभीर हालत में हैं और रोजाना जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
इनमें से कई मरीज अपनी जान बचाने के लिए नियमित डायलिसिस करा रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण हर महीने लगभग 150 मरीज जांच और इलाज के लिए वेल्लोर, दिल्ली, कोलकाता और अन्य शहरों का रुख करते हैं।
अंगदान के लिए बढ़ रही जागरूकता
धनबाद में अंगदान को लेकर धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ रही है। अब तक पांच लोगों ने किडनी समेत अंगदान की घोषणा करते हुए एसएनएमएमसीएच में रजिस्ट्रेशन कराया है। वहीं नेत्रदान सहित अन्य अंगदान के लिए कुल 44 लोगों ने पंजीकरण कराया है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज से फॉर्म लेकर घोषणा पत्र जमा करना होता है।
धनबाद के सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा के अनुसार जिले में किडनी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से वर्तमान डायलिसिस केंद्र को और विकसित किया जा रहा है और नए वार्ड भी बनाए जा रहे हैं।