NEWS PR डेस्क: मंगलवार, 27 जनवरी को बिहार भर में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर राज्य के लगभग सभी सरकारी बैंकों में देखने को मिला। विभिन्न बैंक संगठनों के समर्थन के चलते अधिकतर शाखाओं में ताले लटके रहे, जिससे ग्राहकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
लगातार चार दिनों से बैंकों में अवकाश और हड़ताल की स्थिति बने रहने के कारण एटीएम में नकदी की रिफिलिंग नहीं हो सकी। इसका नतीजा यह रहा कि राजधानी पटना समेत कई जिलों में एटीएम खाली या बंद नजर आए। नकद निकासी, चेक क्लियरेंस और अन्य जरूरी बैंकिंग कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे।
पटना गांधी मैदान के पास बड़ी संख्या में बैंककर्मी एकत्र होकर प्रदर्शन करते दिखे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब आरबीआई और अन्य वित्तीय संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य प्रणाली लागू है, तो बैंकों में इसे लागू क्यों नहीं किया जा रहा। बैंककर्मियों ने बताया कि इस मांग को लेकर आईबीए के माध्यम से भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था और आश्वासन भी मिला, लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं हुआ।
बैंककर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल सरकार और बैंक प्रबंधन का ध्यान आकर्षित करने के लिए की गई है।
गौरतलब है कि 24 जनवरी से लगातार बैंकों के बंद रहने के कारण आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहीं, लेकिन नकद लेन-देन पर इसका खासा असर पड़ा। इस हड़ताल का सबसे अधिक असर सरकारी बैंकों में देखने को मिला, जबकि निजी बैंकों का कामकाज सामान्य दिनों की तरह चलता रहा।