Bargi Dam accident:तूफान के बीच एक मां की आखिरी पकड़, जिसने सबको रुला दिया

डूबती लहरों में भी सबसे मजबूत थी मां की बाहें

Rashmi Tiwari

मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम की शांत दिखने वाली लहरों ने 30 अप्रैल की शाम अचानक ऐसा रौद्र रूप लिया कि कुछ ही पलों में खुशियों से भरी एक क्रूज नाव मातम में बदल गई। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और उफनती लहरों के बीच जब क्रूज संतुलन खोकर डूबने लगी, तब हर ओर चीख-पुकार मच गई—लेकिन इसी अफरा-तफरी में एक मां की ममता सबसे ऊंची साबित हुई।
मौत सामने खड़ी थी, लेकिन उस मां ने हार नहीं मानी
मरीना मैसी नाम की महिला ने अपने चार साल के मासूम बेटे त्रिशान को अपनी ही लाइफ जैकेट में लपेट लिया और उसे सीने से कसकर चिपका लिया। मौत सामने खड़ी थी, लेकिन उस मां ने हार नहीं मानी—उसने आखिरी सांस तक अपने बच्चे को थामे रखा। जब रेस्क्यू टीम पानी के भीतर पहुंची, तो उन्हें जो दृश्य दिखा, वह किसी को भी अंदर तक झकझोर देने के लिए काफी था। धुंधले पानी में, कम होती सांसों के बीच, एक मां अपने बच्चे को ऐसे पकड़े हुई थी जैसे दुनिया की हर मुसीबत से उसे बचा रही हो।
मौत के बाद भी उस मां की पकड़ ढीली नहीं हुई
बचावकर्मियों ने बताया कि जब उन्होंने महिला को बाहर निकालने की कोशिश की, तो शरीर के साथ एक और छोटा शरीर कसकर चिपका हुआ था—वह उसका बेटा था। हैरानी की बात यह थी कि मौत के बाद भी उस मां की पकड़ ढीली नहीं हुई थी। मानो उसकी ममता ने समय और सांस—दोनों को मात दे दी हो।बता दें कि जब दोनों के शव किनारे लाए गए, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। परिवार में चीख-पुकार मच गई। इस दर्दनाक मंजर को देखकर मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह भी खुद को संभाल नहीं सके और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। बता दें कि इसी हादसे में महिला की मां की भी मौत हो गई थी। वहीं, महिला का पति, बेटी सिया और पिता बच गए थे।
अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है,
जानकारी के लिए बता दें कि इस हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 लोग अब भी लापता हैं। कुल 43 लोग इस क्रूज में सवार थे, जिनमें से 28 को सुरक्षित बचा लिया गया। हादसे की वजह अचानक आया तूफान और तेज हवाएं बताई जा रही हैं, जिसने कुछ ही पलों में नाव को पलट दिया।
मां आखिरी सांस तक उस भयावह त्रासदी से जूझती रही
सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन में जुटी हैं, लेकिन इस त्रासदी के बीच जो तस्वीर सबसे गहरी छाप छोड़ गई है, वह एक मां और उसके बच्चे की है—एक ऐसी तस्वीर, जो यह बताती है कि ममता सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि वह ताकत है जो मौत के बाद भी अपने बच्चे को थामे रखती है। ये सिर्फ एक हादसा नहीं था, बल्कि ममता की वह आखिरी झलक थी, जो मौत के बाद भी जिंदा रही। मां आखिरी सांस तक उस भयावह त्रासदी से जूझती रही, लेकिन अपने बच्चे को सीने से लगाए रखा। मौत भी उसके आंचल से मासूम को अलग नहीं कर सकी।

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