बीडीओ और प्रखंड प्रमुख आमने-सामने, कमीशन के आरोप से मचा बवाल

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और प्रखंड प्रमुख के बीच विवाद ने तूल पकड़ लिया है। प्रखंड प्रमुख रीता देवी ने बीडीओ संतोष कुमार पंडित पर 18 प्रतिशत कमीशन मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, इस बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे मामले को और गरमा दिया है।

बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो परबत्ता आईटी भवन स्थित ऑपरेटर कक्ष के पास का है। वीडियो में एक अधिकारी कथित तौर पर गुस्से में यह कहते सुनाई दे रहे हैं, पेमेंट नहीं करेंगे, जाइए, जिसको कहना है कह दीजिए।” हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

प्रमुख का आरोप: भुगतान रोका गया, कमीशन की मांग

प्रखंड प्रमुख रीता कुमारी का कहना है कि पंचायत समिति की योजना के तहत कोलवारा गांव और कोलवारा पंचायत के नवटोलिया में पोखर निर्माण कार्य कराया गया था। इसके अलावा भोरकाठ में पेवर ब्लॉक से संबंधित कार्य भी पूरे किए गए। उनके अनुसार ये सभी योजनाएं करीब आठ महीने पहले पूरी हो चुकी हैं।

प्रमुख का दावा है कि कुल राशि का 60 प्रतिशत भुगतान हो चुका है, लेकिन शेष 40 प्रतिशत का भुगतान अब तक लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीडीओ भुगतान के बदले 18 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे हैं और विरोध करने पर धमकी भरे लहजे में बात करते हैं। प्रमुख ने इस व्यवहार को दुर्व्यवहार बताते हुए कहा कि वे इस मामले की जानकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देंगी और आवश्यकता पड़ी तो महिला आयोग का दरवाजा भी खटखटाएंगी।

बीडीओ ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर, बीडीओ संतोष कुमार पंडित ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि संबंधित योजनाओं की जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने उल्टा आरोप लगाया कि प्रखंड प्रमुख भुगतान को लेकर अनावश्यक दबाव बना रही हैं और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

मामले पर गोगरी एसडीओ संजय कुमार ने कहा कि वे फिलहाल अन्य कार्यों में व्यस्त हैं, लेकिन मामले की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। वायरल वीडियो और दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। आमजन के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सच्चाई क्या है। अब सभी की नजर संभावित प्रशासनिक जांच पर टिकी है, जिससे पूरे मामले की हकीकत सामने आ सके।

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