NEWS PR डेस्क: बिहार के जमीन मालिकों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के जरिए ई-नापी, दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस जैसी सेवाओं के निष्पादन के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित कर दी है। अब तय अवधि के भीतर ही संबंधित कार्य पूरे किए जाएंगे, जिससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने और बिचौलियों पर निर्भर रहने से छुटकारा मिलेगा।
सरकार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि फाइलों को बिना कारण लंबित रखने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत बिना विवाद वाली जमीन की मापी 7 दिनों में और विवादित जमीन की मापी 11 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।
दाखिल-खारिज के मामलों में भी समय-सीमा तय की गई है। बिना विवाद वाले मामलों का निपटारा 14 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। वहीं परिमार्जन प्लस के तहत सामान्य त्रुटियों को 15 दिनों में और जटिल मामलों को 75 दिनों के भीतर सुधारना होगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री सह उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जमीन विवादों की बड़ी वजह फर्जी दस्तावेज हैं। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में ऑनलाइन दाखिल-खारिज के 84 प्रतिशत मामलों का निपटारा हुआ है, जो पहले 75 प्रतिशत था। लंबित मामलों की संख्या घटकर 16 प्रतिशत रह गई है। परिमार्जन प्लस के तहत 75 प्रतिशत मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। राज्य में जमीन सर्वे का काम 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा मार्च से हर जिले में ‘भूमि जनसंवाद’ कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य जमीन मालिकों को सीधे सेवाएं उपलब्ध कराना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। सरकार का दावा है कि इस पहल से पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को समय पर सेवाएं मिलेंगी।
कुल मिलाकर, सरकार की इस नई व्यवस्था से जमीन से जुड़े कामों में पारदर्शिता बढ़ेगी, तय समय में निपटारा होगा और जमीन मालिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।