NEWS PR डेस्क : बिहार में एनडीए सरकार आज विधानसभा में वित्त वर्ष 2026–27 का बजट पेश करने जा रही है। वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव बजट को सदन में रखेंगे, जिसमें पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इस बजट में एक करोड़ रोजगार देने के वादे और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।
आज बिहार विधानसभा में राज्य का बजट पेश किया जाएगा, जिसे प्रदेश की आर्थिक दिशा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार के मौजूदा कार्यकाल का यह पहला पूर्ण बजट होगा। वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव इसे सदन में प्रस्तुत करेंगे।
बीते करीब 20 वर्षों में बिहार के बजट का आकार तेजी से बढ़ा है। जहां 2005–06 में बजट महज 26 हजार करोड़ रुपये का था, वहीं 2025–26 तक यह 3.17 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि बजट का कुल आकार साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से भी आगे निकल सकता है। चुनावी वादों और बढ़ती जन अपेक्षाओं के बीच यह बजट न सिर्फ विकास की गति तय करेगा, बल्कि यह भी साफ करेगा कि सरकार रोजगार और पेंशन जैसे बड़े खर्चों का संतुलन कैसे साधती है।
चुनाव के दौरान नीतीश सरकार ने एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने का जो वादा किया था, उसकी झलक इस बजट में देखने को मिल सकती है। युवाओं के लिए कौशल विकास, प्रशिक्षण और नए पदों के सृजन को लेकर विशेष प्रावधान किए जाने की संभावना है। चूंकि यह एनडीए सरकार का पहला बजट है, इसलिए सामाजिक कल्याण और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर बड़ा निवेश किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
बिहार सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक खर्चों को काबू में रखना बन गई है। जहां वित्त वर्ष 2020–21 में कर्मचारियों के वेतन पर 20,658.91 करोड़ रुपये खर्च होते थे, वहीं 2025–26 तक यह राशि बढ़कर 81,473.45 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। वेतन के अलावा पेंशन भुगतान और पुराने कर्ज पर ब्याज चुकाने में भी सरकार को हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इन अनिवार्य खर्चों के कारण विकास योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है।