NEWS PR डेस्क : ईरान में हुए हमले में मारे गए भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड के रानी बमिया गांव निवासी चीफ इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर अभी तक भारत नहीं पहुंच सका है। घटना को पांच दिन बीत जाने के बाद भी शव के नहीं आने से परिवार और गांव के लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। अब इस मामले में भाजपा नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से जल्द पहल करने की मांग की है।
भाजपा के कई स्थानीय नेताओं ने प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, बिहार के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को ईमेल भेजकर देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द उनके पैतृक गांव पहुंचाने की अपील की है। ईमेल भेजने वालों में भाजपा जिलाध्यक्ष संतोष कुमार, जिला महामंत्री नितेश सिंह, जिला कार्यालय मंत्री प्रदीप कुमार, प्रवक्ता विनोद सिन्हा और कहलगांव विधानसभा प्रभारी डॉ. रोशन सिंह सहित अन्य नेता शामिल हैं।
नेताओं का कहना है कि यह हादसा परिवार के लिए बेहद दुखद और असहनीय है। ऐसे में सरकार को मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करते हुए जल्द से जल्द पार्थिव शरीर को भारत लाने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर सके।
बताया जाता है कि 11 मार्च 2026 को इजरायल-ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के दौरान भारत की ओर आ रहे थाईलैंड के एक समुद्री जहाज पर हमला हुआ था। इसी हमले में देवनंदन प्रसाद सिंह की मौत हो गई थी।
घटना के बाद से ही परिवार उनके पार्थिव शरीर के भारत आने का इंतजार कर रहा है, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बावजूद शव अब तक नहीं पहुंच सका है। इससे घर के लोगों की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। उनकी वृद्ध मां गायत्री देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। बहनें पार्वती देवी, रंजू देवी और मंजू देवी भी इस दुख से उबर नहीं पा रही हैं। वे बार-बार यही कह रही हैं कि जिस भाई की कलाई पर हर साल राखी बांधती थीं, अब उस भाई को आखिरी बार देखने का भी इंतजार करना पड़ रहा है।
देवनंदन प्रसाद सिंह को गांव का एक प्रतिभाशाली और सम्मानित इंजीनियर माना जाता था। उन्होंने अपने गांव में कई सामाजिक कार्य भी किए थे। गांव के प्राथमिक विद्यालय के सामने उन्होंने एक भव्य बजरंगबली मंदिर का निर्माण करवाया था, जो आज भी उनके योगदान की याद दिलाता है।
इस दुखद घटना की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिवार के छोटे भाई कृष्णनंदन प्रसाद सिंह, उनकी पत्नी और बेटी फिलहाल दिल्ली में हैं और पार्थिव शरीर के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वहीं गांव में रोजाना बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दे रहे हैं और पार्थिव शरीर आने का इंतजार कर रहे हैं।