NEWS PR डेस्क: वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति से पहले बिहार सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाया है। वित्त विभाग के विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल द्वारा जारी पत्र के अनुसार 10 मार्च तक वेतन को छोड़कर अन्य सभी प्रकार की निकासी पर रोक लगा दी गई है।
इस संबंध में सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त, जिला पदाधिकारी और कोषागार पदाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में कोषागारों में बड़ी संख्या में विपत्र (बिल) प्रस्तुत किए जाते हैं, जिससे अनावश्यक दबाव बनता है और बजट प्रबंधन प्रभावित होता है।
निर्देश के अनुसार 10 मार्च तक केवल स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय मदों—जैसे वेतन, पेंशन, सहायक अनुदान और संविदा कर्मियों के मानदेय—से जुड़े विपत्र ही स्वीकार और पारित किए जाएंगे। अन्य सभी प्रकार के बिलों की नियमित जांच के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

वित्त विभाग ने बिहार कोषागार संहिता, 2011 का हवाला देते हुए कहा है कि बजट में उपलब्ध राशि का उपयोग वित्तीय अनुशासन के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। सरकार का उद्देश्य वित्तीय वर्ष के अंत में अनियंत्रित खर्च पर रोक लगाना और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
भोजपुर समेत कई जिलों में अरबों के बिल फंसे
इस फैसले का असर कई विभागों और ठेकेदारों पर पड़ा है। भोजपुर जिले में शिक्षा, बिजली, स्वास्थ्य, पथ निर्माण, ग्रामीण सड़क निर्माण, पंचायती राज, भवन निर्माण, अंचल और प्रखंड समेत दर्जनों विभागों के बिल फिलहाल अटक गए हैं।
कई विभाग अब बिल ट्रेजरी में भेज ही नहीं रहे हैं, जबकि कुछ के बिल पहले से ट्रेजरी में लंबित पड़े हैं। काम पूरा होने के बावजूद भुगतान नहीं होने से ठेकेदारों और संबंधित कर्मियों की परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में कई लोगों के लिए इस बार होली का त्योहार फीका पड़ सकता है।
सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि वित्तीय वर्ष के अंत में बजट प्रबंधन संतुलित और पारदर्शी बना रहे।