NEWS PR डेस्क: पटना, 02 मई। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 शैक्षणिक संस्थानों पर सख्त कदम उठाया है। इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के नए आवेदनों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। यह निर्णय संस्थानों द्वारा निर्धारित सीटों से अधिक नामांकन और आवेदन प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद लिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम लिमिटेड (BSFCL) को विभिन्न स्रोतों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ संस्थानों ने निर्धारित सीट आवंटन से अधिक नामांकन (बोनाफाइड) जारी किए हैं। इसके अलावा, कई मामलों में संस्थानों से मांगी गई जानकारी का स्पष्ट जवाब भी नहीं मिला, जिससे पूरी नामांकन प्रक्रिया संदिग्ध प्रतीत हुई। इसी आधार पर समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया कि ऐसे संस्थानों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
नए आवेदनों पर रोक, पुराने को मिलेगी राहत
आदेश के अनुसार, जिन संस्थानों में अनियमितताएं पाई गई हैं, वहां पढ़ने वाले छात्रों के नए आवेदनों के भुगतान पर रोक रहेगी। हालांकि, जिन छात्रों की पहली किस्त का भुगतान पहले ही हो चुका है, उनके आगे की किस्तों का भुगतान जारी रहेगा।
किन संस्थानों पर गिरी गाज?
कार्रवाई की जद में राज्य के कई प्रमुख पैरामेडिकल, मैनेजमेंट और उच्च शिक्षा संस्थान आए हैं, जिनमें गया, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पटना और औरंगाबाद के कॉलेज शामिल हैं। प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं—
- विवेकानंद पैरामेडिकल एंड नर्सिंग कॉलेज, गया
- मगध पैरामेडिकल एंड नर्सिंग इंस्टीट्यूट, गया
- इंदु देवी रंजीत कुमार प्रकाश प्रोफेशनल कॉलेज, वैशाली
- डॉ. रंजीत कुमार प्रकाश कॉलेज, वैशाली
- श्री उमेश मिश्रा रंजीत कुमार प्रकाश कॉलेज, वैशाली
- एमपीएस कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन, मुजफ्फरपुर
- ऑक्सफोर्ड कॉलेज ऑफ रिसर्च एंड मैनेजमेंट, पटना
- चैतन्य कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, पटना
- शिवि कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन, मुजफ्फरपुर
- आर.एस. विद्यापीठ, रामकृष्ण नगर, पटना
- देव कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन, मुजफ्फरपुर
- प्रभु कैलाश इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, औरंगाबाद
- ओमकारा कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजुकेशन, पटना
प्रशासन का सख्त रुख
निगम ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं संस्थानों में नए आवेदनों के भुगतान पर रोक लगाई गई है, जहां अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। साथ ही संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि इन संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों के नए भुगतान को फिलहाल स्थगित रखा जाए।
छात्रों के लिए क्या मायने?
इस फैसले से उन छात्रों पर असर पड़ सकता है, जो इन संस्थानों में नामांकन लेने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, पहले से पढ़ रहे छात्रों को फिलहाल राहत दी गई है, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
यह कदम राज्य सरकार की उस मंशा को दर्शाता है, जिसमें शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई भी संभव है।