AI समिट में बिहार की बड़ी छलांग: 468 करोड़ के निवेश को मिली मंजूरी, टेक माइग्रेशन पर लगेगा ब्रेक

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: बिहार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित वैश्विक एआई कार्यक्रम के दौरान 468 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दिलाई। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और आईटी मंत्री श्रेयसी सिंह की मौजूदगी में यह घोषणा की गई।

IIT पटना में 250 करोड़ का रिसर्च पार्क

निवेश पैकेज की सबसे बड़ी परियोजना IIT Patna में 250 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रिसर्च पार्क की स्थापना है। इस पार्क का उद्देश्य स्टार्टअप, इंडस्ट्री और रिसर्च के बीच मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है, जिससे राज्य में हाई-टेक इनोवेशन को बढ़ावा मिले।

60 करोड़ से AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

राज्य में 60 करोड़ रुपये की लागत से ‘बिहार एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किया जाएगा। इस पहल में Tiger Analytics जैसी निजी कंपनियां तकनीकी सहयोग देंगी। सेंटर का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और एडवांस टेक्नोलॉजी पर होगा।

10 हजार नौकरियां, 50 हजार युवाओं को स्किल ट्रेनिंग

सरकार का लक्ष्य है कि इन परियोजनाओं के जरिए 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए जाएं। साथ ही 50,000 युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में काम करने के योग्य बनाया जाएगा।

नई नीतियों से बढ़ा निवेश का भरोसा

उद्योग मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि राज्य की नई सेमीकंडक्टर और जीसीसी (GCC) नीतियों के कारण टेक कंपनियों की रुचि बढ़ी है। समिट में बिहार का विशेष पवेलियन भी स्थापित किया गया, जहां 135 देशों के प्रतिनिधियों ने राज्य की योजनाओं और संभावनाओं की जानकारी ली।

‘टेक माइग्रेशन’ पर लग सकता है ब्रेक

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के अनुसार, यह निवेश बिहार की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा। उनका कहना है कि आने वाले समय में राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, क्योंकि विश्वस्तरीय अवसर अब बिहार में ही उपलब्ध होंगे।

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