NEWS PR डेस्क : बिहार में साइबर अपराध पर कड़ी पकड़ और तेज़ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। राज्य पुलिस ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक विशेष संयुक्त टीम (मल्टी-डिपार्टमेंट टीम) बनाने की योजना बनाई है। यह टीम ऑनलाइन ठगी, फर्जी सिम बॉक्स, बैंक फ्रॉड और अन्य डिजिटल अपराधों की त्वरित जांच और रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाएगी।
बिहार में साइबर अपराधों पर कड़ी पकड़ और बेहतर जांच सुनिश्चित करने के लिए राज्य पुलिस ने एक नई पहल की शुरुआत की है। इस योजना के तहत विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल करके एक मजबूत और संयुक्त टीम का गठन किया जाएगा, जो साइबर अपराधों पर तेज़ कार्रवाई करेगी और अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी नजर रखेगी।
इस योजना के तहत बिहार पुलिस की साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा इकाई के साथ-साथ दूरसंचार विभाग, मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों और बैंकों के नोडल अधिकारियों को टीम में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, केंद्रीय वित्त मंत्रालय की वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) को भी इसमें शामिल करने की योजना है, ताकि आर्थिक लेन-देन से जुड़े साइबर अपराधों पर अधिक प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
बिहार पुलिस ने इस प्रस्ताव को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने का काम चल रहा है और जल्द ही इसका औपचारिक ढांचा तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद गठित संयुक्त टीम नियमित रूप से बैठकें करेगी और साइबर अपराधों से जुड़े मामलों में साझा रणनीति के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
बिहार में साइबर अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऑनलाइन ठगी, फर्जी बैंक कॉल, ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग और नकली वेबसाइटों के माध्यम से लोगों से पैसे ऐंठने के मामले अब आम हो गए हैं। हाल ही में फर्जी सिम बॉक्स का मामला भी सामने आया, जिसका दायरा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। इन मामलों में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण जांच और कार्रवाई में अक्सर देरी हो जाती है।
इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य पुलिस ने एक नई संयुक्त टीम बनाने का फैसला किया है। इस टीम में दूरसंचार विभाग और मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों की भागीदारी से फर्जी सिम, कॉल रूटिंग और संदिग्ध नंबरों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी। बैंकों के नोडल अधिकारी संदिग्ध लेन-देन, ऑनलाइन फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जानकारी तेजी से साझा कर सकेंगे। साथ ही, वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) की मौजूदगी से अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराधों की जांच और मजबूत होगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराध अब केवल तकनीकी चुनौती नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा विषय बन गया है। ऐसे में विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम बनाकर काम करना समय की मांग है। इससे अपराधियों तक तेज़ी से पहुंचा जा सकेगा और उनकी गतिविधियों पर निरंतर नजर रखी जा सकेगी।
इस पहल का लाभ आम जनता को भी मिलेगा। शिकायत दर्ज कराने से लेकर जांच और कार्रवाई तक की प्रक्रिया तेज होगी, पीड़ितों को समय पर न्याय मिलेगा और साइबर अपराधियों के मनोबल पर भी असर पड़ेगा। बिहार पुलिस का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।
सारांश में, बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए बिहार सरकार और पुलिस की यह संयुक्त पहल एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम है। इससे राज्य में डिजिटल सुरक्षा मजबूत होगी और अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।