NEWS PR डेस्क: पटना, 12 अप्रैल। बिहार के शिक्षा विभाग में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। विभाग की हालिया समीक्षा में खुलासा हुआ है कि राज्य के 18 जिलों ने पिछले छह वर्षों में खर्च की गई करोड़ों रुपये की राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) अब तक जमा नहीं किया है।
अपर मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक में सामने आए इस मामले के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। संबंधित जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) से स्पष्टीकरण मांगा गया है और विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच स्कूलों को शैक्षणिक सामग्री, भवन निर्माण और मरम्मत जैसे कार्यों के लिए बड़ी राशि जारी की गई थी। नियमानुसार, खर्च के बाद उसका पूरा विवरण और उपयोगिता प्रमाण पत्र विभाग को देना अनिवार्य होता है, लेकिन कई जिलों ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
स्थिति यह है कि Patna, Gaya और Muzaffarpur जैसे प्रमुख जिलों में ही तीन-तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि का हिसाब लंबित है। इसके अलावा पश्चिम चंपारण, नालंदा, नवादा, पूर्वी चंपारण, वैशाली, खगड़िया, कटिहार, कैमूर, दरभंगा, शिवहर, अरवल, जमुई और गोपालगंज समेत कुल 18 जिले इस दायरे में आए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना उपयोगिता प्रमाण पत्र के खर्च की गई राशि को अनियमितता माना जाएगा। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
अब सभी संबंधित जिलों को छह वर्षों के खर्च का पूरा ब्योरा तैयार कर विभाग को सौंपना होगा। इस कार्रवाई को शिक्षा विभाग में वित्तीय अनुशासन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।