NEWS PR डेस्क: बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शानदार जीत दर्ज करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। BNP ने 299 में से 209 सीटें जीतकर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया है। अब तक 286 सीटों के नतीजे घोषित किए जा चुके हैं। इस जीत के साथ करीब 20 साल बाद बांग्लादेश में BNP की सरकार बनने जा रही है।

जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को अब तक 70 सीटों पर जीत मिली है। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत हासिल की है। इससे पहले 2008 से 2024 तक देश में शेख हसीना की अगुवाई वाली अवामी लीग सत्ता में रही थी।
तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना मजबूत:
इस बड़ी जीत के बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और BNP अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। तारिक रहमान ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत हासिल की है। वे पिछले साल दिसंबर में 17 साल के लंबे अंतराल के बाद बांग्लादेश लौटे थे। उनकी अगुवाई में पार्टी को यह बड़ी सफलता मिली है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तारिक रहमान को जीत की बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह जीत बांग्लादेश के लोगों के उनके नेतृत्व में भरोसे को दिखाती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में हमेशा खड़ा रहेगा। इसके साथ पीएम मोदी ने भारत और बांग्लादेश के रिश्ते को लेकर भी अपनी बड़ा संकेत दिया। पीएम मोदी ने कहा कि वह तारिक रहमान के साथ मिलकर भारत-बांग्लादेश के बहुआयामी संबंधों को और मजबूत करने और दोनों देशों के साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए काम करने के लिए उत्सुक हैं।
35 साल बाद बनेगा पुरुष प्रधानमंत्री:
इस चुनाव के बाद बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनने जा रहा है। इससे पहले 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 से 2024 तक देश की राजनीति में शेख हसीना और खालिदा जिया का ही दबदबा रहा और दोनों ही नेता बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनती रहीं।
BNP की जीत की बड़ी वजहें:
विशेषज्ञों के अनुसार BNP की एकतरफा जीत के पीछे कई अहम कारण रहे। अवामी लीग के पारंपरिक वोटर, खासकर हिंदू समुदाय के मतदाता, इस बार BNP के पक्ष में चले गए। BNP ने गोपालगंज, खुलना, सिलहट, चटगांव और ठाकुरगंज जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जीत हासिल की।

वहीं, जमात-ए-इस्लामी का अतीत भी उसके खिलाफ गया। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में उसके विरोध को लोग भूले नहीं, जिसका असर चुनाव नतीजों में दिखा। इसके अलावा स्टूडेंट्स की नेशनल सिटीजन पार्टी को भी आपसी मतभेद और जमात से गठबंधन का नुकसान उठाना पड़ा और मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया।
वोटिंग के दौरान कई जगह हिंसा:
चुनाव के दौरान कई जगहों पर हिंसा और झड़प की घटनाएं भी सामने आईं। खुलना में एक मतदान केंद्र के बाहर जमात-ए-इस्लामी और BNP कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में BNP नेता मोहिबुज्जमान कोच्चि की मौत हो गई।
इसके अलावा मुंशीगंज-3 और गोपालगंज सदर क्षेत्र में मतदान केंद्रों के बाहर देसी बम फेंके गए, जिससे गोपालगंज में तीन लोग घायल हो गए।
भारत ने कहा—नतीजों पर नजर:
बांग्लादेश चुनाव को लेकर भारत ने कहा है कि वह नतीजों का इंतजार कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अंतिम परिणाम आने के बाद ही जनादेश की दिशा और उसके प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
इस ऐतिहासिक जीत के साथ बांग्लादेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, जहां BNP की सरकार बनने और तारिक रहमान के नेतृत्व में नई राजनीतिक दिशा तय होने की उम्मीद है।