जनगणना-2027 को लेकर बिहार सरकार का बड़ा आदेश, 31 मार्च 2027 तक अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले पर रोक

Shreya Raj
जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर अधिकारियों और कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण।

NEWS PR डेस्क : पटना : बिहार में जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। जनगणना कार्य में लगाए गए अधिकारियों, कर्मचारियों, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के स्थानांतरण पर 31 मार्च 2027 तक रोक लगा दी गई है। सरकार ने संबंधित कर्मियों को वर्तमान पदस्थापन स्थल पर ही बनाए रखने का निर्देश दिया है, ताकि जनगणना का काम बिना किसी रुकावट के समय पर पूरा किया जा सके।

जनगणना कार्य में लगे कर्मियों का नहीं होगा सामान्य तबादला

बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के जनगणना कोषांग की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किया गया है। विभाग ने कहा है कि जनगणना-2027 राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और इसे तय समय-सीमा के भीतर सही तरीके से पूरा करना जरूरी है। इसी को देखते हुए जनगणना कार्य में प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों और कर्मियों को 31 मार्च 2027 तक उनके मौजूदा पदस्थापन स्थल पर ही रखने का फैसला लिया गया है।

जनगणना का काम जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियमावली, 1990 के प्रावधानों के तहत कराया जा रहा है। विभाग का कहना है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के बार-बार स्थानांतरण से जनगणना की तैयारियों और प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है इसलिए काम में निरंतरता बनाए रखना जरूरी है।

जिला स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय

जनगणना-2027 के संचालन के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। जिला पदाधिकारी (DM) को प्रधान जनगणना पदाधिकारी, जबकि जिला सांख्यिकी पदाधिकारी को अपर जिला जनगणना पदाधिकारी बनाया गया है।

इसके अलावा प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचलाधिकारी (CO) को चार्ज अधिकारी के रूप में अधिसूचित किया गया है। जिला और प्रखंड स्तर पर बनाए गए जनगणना कोषांगों में अलग-अलग विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी प्रतिनियुक्त किया गया है।

शिक्षकों और अन्य कर्मियों को भी मिली जिम्मेदारी

जनगणना के लिए शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को प्रगणक और पर्यवेक्षक के तौर पर नामित किया गया है। इन कर्मचारियों को जनगणना से संबंधित कार्यों के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन कर्मचारियों को जनगणना की जिम्मेदारी दी गई है, वे पूरी प्रक्रिया के दौरान अपने क्षेत्र और जिम्मेदारी से जुड़े रहें। इससे जनगणना के काम में किसी तरह की प्रशासनिक परेशानी या समन्वय की कमी नहीं होगी।

बिना सहमति नहीं किया जा सकेगा तबादला

विभाग ने जनगणना नियमावली, 1990 के नियम-8 (VI) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि जनगणना कार्य में लगाए गए पदाधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण प्रधान/जिला जनगणना पदाधिकारी की उचित सहमति के बिना नहीं किया जाएगा।

केंद्र और राज्य सरकार के स्तर से भी जनगणना कार्य की निरंतरता और बेहतर संचालन के लिए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्धारित अवधि तक वर्तमान पदस्थापन स्थल पर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सामान्य तबादले की प्रक्रिया से जनगणना कर्मी रहेंगे बाहर

दरअसल, विभाग को ऐसी जानकारी मिल रही थी कि सामान्य स्थानांतरण और पदस्थापन प्रक्रिया के तहत विभिन्न विभागों की ओर से जनगणना कार्य के लिए नामित अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला किया जा रहा है। इनमें चार्ज ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे BDO, CO और कार्यपालक पदाधिकारी, जनगणना कोषांग के कर्मचारी तथा प्रशिक्षित प्रगणक और पर्यवेक्षक शामिल हैं।

इसी के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए निर्देश जारी किया है कि जनगणना कार्य में लगाए गए इन अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण नहीं किया जाए। इससे जनगणना-2027 की तैयारियों में लगे कर्मियों के सामान्य तबादले पर फिलहाल स्थिति साफ हो गई है।

31 मार्च 2027 तक जारी रहेगी व्यवस्था

सरकार के निर्देश के अनुसार जनगणना-2027 के लिए प्रतिनियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों को 31 मार्च 2027 तक मौजूदा पदस्थापन स्थल पर बनाए रखा जाना है। विभाग का मानना है कि एक ही स्थान पर अधिकारियों और कर्मचारियों के बने रहने से जनगणना की तैयारियों में निरंतरता रहेगी और काम को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने में मदद मिलेगी।

बिहार सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में जनगणना-2027 की तैयारियों को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं। सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इन जिम्मेदारियों में बार-बार होने वाले प्रशासनिक बदलाव के कारण जनगणना का काम प्रभावित न हो।

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