चेक डैम ने बदली किसानों की तकदीर: फसलों को मिली संजीवनी, पेयजल संकट हुआ समाप्त

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: दरभंगा जिले के अलीनगर प्रखंड अंतर्गत हरसिंगपुर गांव में निर्मित चेक डैम आज ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की मिसाल बन गया है। वर्षा जल संचयन के उद्देश्य से बनाए गए इस डैम ने न केवल किसानों की सिंचाई समस्या को दूर किया है, बल्कि पीने के पानी के संकट से भी ग्रामीणों को राहत दिलाई है।

करीब चार हजार की आबादी वाले इस गांव में जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत करीब 9.84 लाख रुपये की लागत से बने चेक डैम से अब गांव में खुशहाली लौटती दिखाई दे रही है।

पहले जल संकट, अब स्थायी समाधान

कुछ वर्ष पहले तक हरसिंगपुर में वर्षा जल संचयन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। बरसात का पानी नालों और नदियों के रास्ते बहकर बाहर निकल जाता था। गर्मी के मौसम में भू-जल स्तर नीचे चले जाने से कुएं, चापाकल और अन्य जलस्रोत सूख जाते थे।

सिंचाई की सुविधा न होने के कारण खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी। इससे किसान साल में केवल एक फसल ही उगा पाते थे। कम उत्पादन के कारण आय सीमित थी और पशुपालन व घरेलू उपयोग के लिए पानी जुटाना भी एक बड़ी चुनौती बन चुका था। रोजगार की कमी के चलते युवाओं को शहरों की ओर पलायन करना पड़ता था।

मनरेगा से बने चेक डैम ने बदली तस्वीर

ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा के तहत चेक डैम निर्माण का निर्णय लिया। इसके बाद हरसिंगपुर में यह महत्वपूर्ण संरचना तैयार की गई।

आज इस चेक डैम से करीब 250 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई सुनिश्चित हो रही है। साथ ही लगभग 500 पशुधन को नहाने, सफाई और पीने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे गांव के करीब 670 लोग प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।

खेती में विविधता और आय में वृद्धि

सिंचाई सुविधा मिलने के बाद अब गांव में सब्जी, दलहन और तिलहन जैसी फसलों की खेती शुरू हो चुकी है। पहले जहां किसान केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, वहीं अब वे बाजार की मांग के अनुरूप विविध फसलें उगा रहे हैं।

इससे न सिर्फ कृषि उत्पादन बढ़ा है, बल्कि किसानों की आमदनी में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जल उपलब्धता के कारण पशुपालन को भी बढ़ावा मिला है, जिससे ग्रामीणों की आजीविका के नए स्रोत विकसित हुए हैं।

पर्यावरण संतुलन और हरियाली में सुधार

चेक डैम बनने से क्षेत्र में हरियाली बढ़ी है और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत हुआ है। भू-जल स्तर में स्थायी वृद्धि, वर्षा जल का संरक्षण और पुनर्भरण जैसी सकारात्मक उपलब्धियां सामने आई हैं।

गांव में अब पक्षियों और पशुओं के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध है, जिससे जैव विविधता को संरक्षण मिल रहा है।

चेक डैम से मिले प्रमुख लाभ

  • भू-जल स्तर में स्थायी वृद्धि
  • वर्षा जल का संरक्षण एवं पुनर्भरण
  • सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय सुधार
  • कृषि उत्पादन एवं किसान आय में बढ़ोतरी
  • पशुपालन एवं आजीविका में सुधार
  • पर्यावरण संरक्षण एवं हरित आवरण में वृद्धि
  • ग्रामीण पलायन में कमी किसानों की जुबानी

हरसिंगपुर के किसान शंकर यादव ने कहा, “जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत बने चेक डैम से हमारे गांव में पानी की समस्या समाप्त हो गई है। अब खेती, पशुपालन और रोजगार में काफी सुधार हुआ है।”

वहीं किसान उमेश यादव ने बताया,“चेक डैम निर्माण जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में बेहद सफल साबित हुआ है। इससे स्थायी जल प्रबंधन और जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है।”

विकास की नई राह पर हरसिंगपुर

आज हरसिंगपुर गांव जल संरक्षण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन चुका है। चेक डैम ने यहां न सिर्फ पानी की समस्या का समाधान किया है, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर गांव को विकास की नई राह पर अग्रसर किया है।

यह पहल साबित करती है कि सही योजना और प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण भारत में स्थायी विकास और समृद्धि का सपना साकार किया जा सकता है।

Share This Article