पटना में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर एक अहम फैसला लिया गया है। बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री आवास ‘1 अणे मार्ग’ का नाम बदलकर अब आधिकारिक रूप से ‘लोक सेवक आवास’ कर दिया है। यह निर्णय 7 मई को कैबिनेट विस्तार से पहले जारी अधिसूचना के जरिए सामने आया।

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सरकारी आवास के रूप में कर्णांकित ‘1 अणे मार्ग, पटना’ को अब सभी आधिकारिक कार्यों में ‘लोक सेवक आवास’ के नाम से जाना जाएगा। पिछले करीब 20 वर्षों से यह आवास बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उपयोग में रहा था, हालांकि बीच में कुछ समय के लिए जीतन राम मांझी भी यहां रहे। अब नीतीश कुमार पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में शिफ्ट हो चुके हैं, जबकि यह आवास मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आवंटित किया गया है।

नाम बदलने के पीछे सोच
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का मानना है कि मुख्यमंत्री का पद जनता की सेवा का प्रतीक है, न कि सत्ता का। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए इस आवास का नाम ‘लोक सेवक आवास’ रखा गया है, ताकि शासन और जनसेवा के बीच एक स्पष्ट संदेश दिया जा सके।
यह फैसला बीजेपी सरकार बनने के बाद किसी प्रमुख सरकारी भवन या स्थल के नामकरण का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि ‘लोक सेवक आवास’ के ठीक बगल में राज्यपाल का आवास ‘लोक भवन’ स्थित है, जिससे यह बदलाव और भी प्रतीकात्मक हो जाता है। इस नाम परिवर्तन को बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां प्रशासनिक प्रतीकों के जरिए शासन की छवि को नए रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है।