NEWS PR डेस्क:भागलपुर के पॉलिटेक्निक कॉलेज में संचालित बाढ़ राहत शिविर में इन दिनों बच्चों और महिलाओं के बीच रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राहत शिविर में रह रहे बच्चे बिहार की पारंपरिक लोककला मंजूषा पेंटिंग सीख रहे हैं। रंगों और कूची के जरिए बच्चे कागज पर अपनी कल्पनाओं को उकेर रहे हैं। इससे मुश्किल हालात के बीच उनके चेहरों पर खुशी नजर आ रही है।
मंजूषा गुरु बच्चों और महिलाओं को दे रहे प्रशिक्षण
मंजूषा गुरु मनोज पंडित राहत शिविर में बच्चों और महिलाओं को मंजूषा चित्रकला की बारीकियां सिखा रहे हैं। वे उन्हें इस पारंपरिक कला की शैली, आकृतियों और रंगों के इस्तेमाल की जानकारी दे रहे हैं। बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं और कागज पर मंजूषा कला की आकर्षक आकृतियां बना रहे हैं।
मनोज पंडित ने बताया कि बच्चों में मंजूषा पेंटिंग सीखने को लेकर काफी उत्साह है। बाढ़ जैसी कठिन परिस्थितियों के बीच कला से जुड़ने का अवसर मिलने से बच्चों का मनोबल बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेंटिंग के दौरान बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई देती है।
पढ़ाई के साथ कला से जुड़ रहे बाढ़ प्रभावित बच्चे
बिहार सरकार के निर्देश पर भागलपुर जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ राहत शिविर में अस्थायी विद्यालय भी संचालित किया जा रहा है। यहां राहत शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है। इसके साथ ही उन्हें कला, पेंटिंग और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासन की इस पहल से राहत शिविर में बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। मंजूषा पेंटिंग के प्रशिक्षण से बच्चों को बिहार की लोककला और सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित कराया जा रहा है।
बाढ़ के कारण विस्थापित परिवारों के लिए राहत शिविर में जीवन आसान नहीं है। ऐसे में शिक्षा और रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के तनाव को कम करने और उनके भीतर सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मददगार साबित हो रही हैं। शिविर में बच्चों और महिलाओं की भागीदारी से एक सकारात्मक माहौल बन रहा है। कार्यक्रम के दौरान मनीष कुमार और मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने भी अपनी बात रखी।
भागलपुर से रिपोर्टर: श्यामानंद सिंह