NEWS PR डेस्क:बिहार में विधान परिषद यानी एमएलसी चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। एक तरफ एनडीए सभी आठ सीटों पर जीत का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ जेडीयू विधायक अनंत सिंह के रुख ने गठबंधन के भीतर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। इसी बीच चिराग पासवान के रुख को लेकर भी निगाहें टिकी हैं। चुनाव में सहयोगियों के बीच एकजुटता बनाए रखना एनडीए के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।
अनंत सिंह के विरोध से बढ़ी सियासी गर्मी
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह उनकी उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं। अनंत सिंह ने नीरज कुमार को चुनाव में हराने की बात कही है और जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार करने का रुख अपनाया है। इससे जेडीयू के भीतर असहमति और एनडीए की चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
NDA का लक्ष्य, सभी आठ सीटों पर जीत
दूसरी ओर, एनडीए के नेता विधान परिषद की सभी आठ सीटों पर जीत हासिल करने की रणनीति बना रहे हैं। गठबंधन की बैठकों में मतों के बिखराव को रोकने और अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन जुटाने पर जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी सभी सीटों पर जीत सुनिश्चित करने की अपील कर चुके हैं।
क्या विरोध से बिगड़ेगा चुनावी गणित
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अनंत सिंह का विरोध पटना स्नातक सीट के चुनावी समीकरण को कितना प्रभावित करेगा। क्या एनडीए के नेता अपने मतदाताओं को एकजुट रखने में सफल होंगे, या अंदरूनी मतभेद उम्मीदवारों की मुश्किलें बढ़ाएंगे,