NEWS PR डेस्क: पटना, 16 मार्च। राज्य के चयनित पैक्सों और एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) को सशक्त बनाने के उद्देश्य से सोमवार को डीएनएस क्षेत्रीय सहकारिता प्रबंधन संस्थान, पटना में एंटरप्राइज डेवलपमेंट विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने किया।
इस अवसर पर मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार पैक्सों को गोदाम, कॉमन सर्विस सेंटर, प्रशिक्षण सहित कई सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, इसलिए पैक्सों की जिम्मेदारी है कि वे इन संसाधनों का लाभ समाज के अन्य लोगों तक भी पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि पैक्सों का जितना अधिक विस्तार होगा, उतना ही अधिक लाभ समाज और किसानों को मिलेगा।
मंत्री ने सुझाव दिया कि पैक्स अपने-अपने क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार शहद उत्पादन, बकरी पालन, वेजफेड जैसे कार्यों के साथ अन्य नए उद्यम शुरू कर सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से सामूहिक प्रयास कर समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पैक्स और एफपीओ को उद्यमी के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि पैक्स किसी एक व्यक्ति की संस्था नहीं है, बल्कि यह एक लोकतांत्रिक व्यवस्था है, जिसमें सभी सदस्यों की समान भागीदारी होती है। सामाजिक भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों को काम के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

वहीं विभाग के निबंधक, सहयोग समितियां रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि विभाग की कार्ययोजना के तहत गांवों में ही रोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिल सके और गांव आत्मनिर्भर बन सकें।
इस अवसर पर नाबार्ड, बिहार के मुख्य महाप्रबंधक गौतम सिंह, बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार, जीटी के कार्यकारी निदेशक रिशु रवि और अपर निबंधक विकास कुमार बरियार ने भी अपने विचार साझा किए।
बाजार और तकनीक से जुड़े प्रशिक्षण पर जोर
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पैक्सों को आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, नए उद्यमों की स्थापना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए व्यावसायिक अवसरों की पहचान करने में सक्षम बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा पैक्स प्रतिनिधियों को कृषि आधारित उद्यम, प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, बाजार से जुड़ाव और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
इस कार्यक्रम से उम्मीद जताई जा रही है कि पैक्स और एफपीओ को मजबूत आधार मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार तथा कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा।