NEWS PR डेस्क: जंतर-मंतर पर लंबे समय से जारी कॉकक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन आखिरकार सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद समाप्त हो गया। दोनों पक्षों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझौते की जानकारी दी, जिसके बाद सीजेपी ने धरना वापस लेने का ऐलान किया।
सरकार ने CJP के प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। सबसे अहम मांग के तहत शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर भी सहमति बनी है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि अगले कुछ दिनों में एफआईआर वापसी की प्रक्रिया पूरी कर संबंधित दस्तावेज संगठन को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। साथ ही भविष्य में सीजेपी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस आंदोलन के संबंध में कोई नई कार्रवाई नहीं की जाएगी और इसका लिखित मसौदा भी जल्द साझा किया जाएगा।

सरकार और सीजेपी प्रतिनिधिमंडल के बीच तीन चरणों में हुई विस्तृत वार्ता के दौरान नीट परीक्षा से प्रभावित परिवारों के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। सीजेपी ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग रखी थी। इस पर सरकार ने नियमों के अनुरूप सम्मानजनक मुआवजा देने का आश्वासन दिया है।
बैठक में सीजेपी ने परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े पांच प्रमुख सुझावों का एक चार्टर भी सरकार को सौंपा। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और अगले चार सप्ताह के भीतर दोनों पक्ष फिर बैठक कर सुधारों की दिशा में आगे की रणनीति तय करेंगे।
सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद जेपी नड्डा ने आंदोलन समाप्त करने की अपील की, जिसे स्वीकार करते हुए सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने औपचारिक रूप से धरना खत्म करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि संगठन सरकार द्वारा किए गए वादों के समयबद्ध क्रियान्वयन की उम्मीद करता है और समझौते की भावना का सम्मान करते हुए आंदोलन वापस लिया जा रहा है।
