NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली,पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की मांग को स्वीकार नहीं किया और झारखंड हाई कोर्ट के जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने से भी इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लालू यादव को जमानत मिले करीब सात वर्ष हो चुके हैं और इस मामले से जुड़ी अपील वर्ष 2018 से लंबित है। अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह लंबित अपीलों की जल्द सुनवाई कर उनका निपटारा करे।
सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि हाई कोर्ट ने सजा निलंबित करते समय तथ्यात्मक त्रुटि की। उनका कहना था कि पहले दो बार सजा निलंबन की अर्जी खारिज हो चुकी थी, लेकिन तीसरी बार यह मानकर राहत दे दी गई कि लालू यादव अपनी सजा का 50 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर चुके हैं, जबकि यह निष्कर्ष सही नहीं था।

सीबीआई ने अदालत में यह भी तर्क रखा कि लालू यादव को चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में अलग-अलग सजाएं मिली हैं। ऐसे में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 427 लागू होती है, जिसके तहत बाद में सुनाई गई सजा सामान्यतः पहली सजा पूरी होने के बाद शुरू होती है, जब तक अदालत उन्हें समवर्ती (Concurrent) रूप से चलाने का आदेश न दे।
एएसजी एस.वी. राजू ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सभी मामलों को एक साथ मानने की गलती की, जबकि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों में धारा 427 की व्याख्या स्पष्ट है। इसके बावजूद हाई कोर्ट ने यह मान लिया कि लालू यादव आधी सजा पूरी कर चुके हैं और इसी आधार पर उन्हें राहत दे दी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की इन दलीलों के बावजूद फिलहाल जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया और मामले के अंतिम निपटारे के लिए हाई कोर्ट से जल्द सुनवाई करने को कहा।
