NEWS PR डेस्क: पटना, 03 अप्रैल। बिहार सरकार ने राज्य में उच्च शिक्षा की गिरती गुणवत्ता और शोध-नवाचार की कमी को गंभीरता से लेते हुए कई ठोस कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए नए दिशा-निर्देश जल्द लागू किए जाएंगे।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में हाल ही में बिहार लोक भवन में हुई कुलपतियों की बैठक में उच्च शिक्षा सुधार पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में शिक्षा में नामांकन बढ़ाने, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने तथा गुणवत्ता सुधारने के उपायों पर जोर दिया गया।
इस बैठक में राज्य सरकार ने तय किया कि शोध और नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय संस्थानों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं, गुणवत्ता सुधार के लिए नई पहल न करने वाले विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का प्रदर्शन आधार पर शैक्षणिक अंकेक्षण (एजुकेशनल ऑडिट) कराया जाएगा।
विशेष रूप से वोकेशनल कोर्स में फीस असमानता और नामांकन में भिन्नता को देखते हुए, राज्य सरकार ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि वोकेशनल कोर्स की फीस एकरूप हो और यूजीसी की गाइडलाइन का सख्ती से पालन हो।
बिहार लोक भवन के विश्वविद्यालय शाखा के अधिकारी के अनुसार, यह कदम विशेषकर निजी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई संस्थानों में फीस और नामांकन में असमानता की शिकायतें मिलती रही हैं।
इस दिशा में राज्य सरकार की पहल का मकसद स्पष्ट है: उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधारना, शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करना और छात्रों के हितों की सुरक्षा करना। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुपालन को लेकर अब विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को सख्ती से निर्देशित किया जाएगा, ताकि मनमानी और अनुचित शुल्क वृद्धि जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।