बिहार में एथनॉल संकट: कम एलोकेशन के कारण प्लांट बंद, 10,000 से अधिक रोजगार पर खतरा

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: बिहार का एथनॉल उद्योग इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहा है। कम एलोकेशन और घटती खरीद के कारण राज्य के कई एथनॉल प्लांट बंद होने की कगार पर हैं। इसका सीधा असर रोजगार और किसानों की आय पर पड़ रहा है।

बक्सर का प्लांट एक महीने के लिए बंद

बक्सर जिले के नवानगर स्थित एथनॉल प्लांट को 17 मार्च 2026 से एक महीने के लिए बंद कर दिया गया है। प्रबंधन ने सभी कर्मचारियों को अवकाश पर भेज दिया है। अब प्लांट का संचालन अगले क्वार्टर (मई–जुलाई) में मिलने वाले नए आदेशों पर निर्भर करेगा।

पूरे राज्य में एक जैसी स्थिति

सूत्रों के मुताबिक, यह समस्या केवल एक प्लांट तक सीमित नहीं है। बिहार के लगभग सभी एथनॉल प्लांट इसी तरह के संकट से जूझ रहे हैं। एथनॉल सप्लाई का एलोकेशन घटाकर करीब 45%–55% कर दिया गया है, जिससे उत्पादन और सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है।

OMCs की खरीद में कमी

बताया जा रहा है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने नवंबर 2025 से बिहार से एथनॉल की खरीद घटा दी है, जबकि अन्य राज्यों से अधिक खरीद की जा रही है। इस नीति ने राज्य के उद्योगों पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है।

सरकार से लगातार गुहार

एथनॉल प्लांट मालिक इस मुद्दे को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के शीर्ष स्तर तक गुहार लगा चुके हैं। नीतीश कुमार, उद्योग मंत्री के साथ-साथ केंद्र में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों को पत्र लिखे गए हैं। हालांकि, अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

रोजगार और किसानों पर मार

इस संकट का सबसे बड़ा असर रोजगार पर पड़ रहा है। एथनॉल प्लांट बंद होने से 10,000 से ज्यादा लोगों की नौकरियां खतरे में हैं। वहीं, मक्का उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि एथनॉल उत्पादन में मक्का प्रमुख कच्चा माल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही एलोकेशन और खरीद नीति में सुधार नहीं किया गया, तो बिहार का एथनॉल उद्योग गहरे संकट में चला जाएगा। इसका असर न सिर्फ उद्योग पर, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र पर भी व्यापक रूप से पड़ेगा।

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