गया में उत्खनन से खुलेंगे इतिहास के नए पन्ने, बौद्ध-अवशेषों के संकेत

मगध की विरासत, विज्ञान की नजर से

Rashmi Tiwari

गया जिले के गुरुआ प्रखंड स्थित डुब्बा (भुरहा) पुरातात्त्विक स्थल अब इतिहास के नए अध्याय लिखने की ओर बढ़ रहा है। यहां Magadh University द्वारा वैज्ञानिक पुरातात्त्विक उत्खनन कार्य की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। यह विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार किया जा रहा वैज्ञानिक उत्खनन अभियान है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।
बौद्ध और हिंदू धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र
करीब एक किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले इस स्थल पर प्राचीन ईंट-निर्मित संरचनाएं, मूर्तियां, जल-संरचनाएं और विकसित बसावट के महत्वपूर्ण प्रमाण मिले हैं। प्रारंभिक अध्ययन में यह संकेत मिला है कि यह क्षेत्र प्राचीन काल में बौद्ध और हिंदू धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा होगा। अधिकांश प्राप्त मूर्तियां बौद्ध शैली की बताई जा रही हैं।

उत्खनन शुरू करने से पहले विस्तृत सर्वेक्षण, एरियल फोटोग्राफी, टोपोग्राफिकल स्टडी और पुरावशेषों का दस्तावेजीकरण किया गया। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अनुमति के पश्चात फरवरी 2026 में इस परियोजना को औपचारिक मंजूरी दी गई।इस उत्खनन परियोजना के निदेशक शंकर शर्मा और सह-निदेशक डॉ. अलका मिश्रा को बनाया गया है। वहीं Shashi Pratap Shahi ने इस ऐतिहासिक अभियान को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इस शोध कार्य में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और नव नालंदा महाविहार के प्रशिक्षु छात्र-छात्राएं भी सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

Shashi Pratap Shahi ने कहा कि यह उत्खनन मगध कालीन सभ्यता और संस्कृति को समझने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के एशियन स्टडीज और प्राचीन इतिहास विभाग के शिक्षकों और छात्रों ने इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य किया है।उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार से अनुमति प्राप्त कर यह उत्खनन कार्य शुरू किया गया है और यह Magadh University के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उनके अनुसार, यह विश्वविद्यालय देश के चुनिंदा संस्थानों में शामिल हो गया है जहां शिक्षकों और छात्रों के द्वारा उत्खनन कार्य किया जा रहा है।
कार्य विश्वविद्यालय की उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका
कुलपति ने विश्वास जताया कि भविष्य में नैक मूल्यांकन के दौरान यह शोध और उत्खनन कार्य विश्वविद्यालय की उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, भुरहा स्थल से मिलने वाले निष्कर्ष प्राचीन मगध की धार्मिक, सांस्कृतिक और बसावट परंपराओं को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यह खोज बिहार की ऐतिहासिक विरासत को एक नई पहचान देने वाली मानी जा रही है।
गया से आशिष कुमार की रिपोर्ट

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