सरकारी अस्पताल में डॉक्टर का गाउन नहीं रहने की वजह से टाल दिया ऑपरेशन,गर्भवती महिला का हाल हुआ बेहाल

Patna Desk
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भागलपुर के सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मियों का एक ऐसा कारनामा सामने आया है जिसे सुनकर आप भी कहेंगे “अब तो हद हो गई” लापरवाही की इंतहा हो गई। दरअसल पूर्वी बिहार के सबसे बड़े अस्पताल जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के प्रसव विभाग में डॉक्टर का गाउन नहीं रहने की वजह से प्रसव के लिए आई महिला को रात भर ऑपरेशन का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान महिला दर्द से तड़पती रही लेकिन किसी कर्मचारी को आह तक नहीं आई।

इस दौरान रात के वक्त उसके परिजन कभी हेल्थ मैनेजर तो कभी हॉस्पिटल के किसी स्टाफ को फोन लगाते रहे लेकिन कोई उनकी सुद लेने वाला नहीं था। केवल इतना ही नहीं ड्यूटी पर तैनात नर्स और अन्य कर्मचारियों ने भी उनकी मदद नहीं की। भागे-भागे उसके परिजन इमरजेंसी के कंट्रोल रूम में गाउन खोजने पहुंचे लेकिन वहां भी उन्हें गाउन नहीं मिला। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की वजह से गर्भवती महिला पूरे रात गायनी वार्ड में तड़पती रही चीखती रही।

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जानिए पूरा मामला..-

दरअसल रविवार रात मुंगेर के बेलहर संग्रामपुर से रानी देवी को लेकर परिजन अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड आए। जहां से उन्हें सीधे गाइनी विभाग भेज दिया गया। डॉक्टर ने उसकी जांच की और प्रसव कराने की तैयारी शुरू कर दी, परिजनों को बताया गया कि जल्द से जल्द महिला का प्रसव करना ही ठीक है। लेकिन थोड़ी ही देर बाद अंदर से बताया गया कि अभी समय है तुरंत प्रसव कराना ठीक नहीं होगा। हालांकि डॉक्टर द्वारा प्रसव नहीं करने का कारण कुछ और ही था, ऑपरेशन थिएटर के अंदर डॉक्टर का गाउन मौजूद नहीं था जिस वजह से उसने ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया, प्रसव कराने के समय गाउन को ढूंढा जाने लगा, हर दराज को देखा गया पर गाउन नहीं मिला। फिर ऑपरेशन को सुबह के लिए टाल दिया गया सरकारी अस्पताल के वार्ड में किस-किस चीज की कमी है इसकी देखरेख की जिम्मेदारी सिस्टर इंचार्ज की होती है लेकिन शनिवार को सभी को घर जाने की जल्दी थी किसी ने यह नहीं देखा की ओटी के अंदर गाउन है भी या नहीं, दूसरे दिन रविवार था तो जिम्मेदार लोग छुट्टी पर थे। ऐसे में रविवार रात को गर्भवती महिला का प्रसव नहीं करवाया जा सका, और वह पूरी रात दर्द से तड़पती रही फिर सोमवार सुबह 9 बजे प्रसव कराया गया। लेकिन इतने बड़े सरकारी अस्पताल के ऐसे लाचार प्रबंधन को देखकर स्वास्थ्य विभाग के कामकाज के रवैये पर सवाल खड़े होते हैं।

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