NEWS PR डेस्क: पटना, 30 अगस्त 2026: बिहार सरकार किसानों को गुणवत्तायुक्त खाद और बीज समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि राज्य में उर्वरक बिक्री व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी और अधिक सुव्यवस्थित बनाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 31 अगस्त 2026 को कृषि भवन सभागार, मीठापुर, पटना में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का विषय ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ रखा गया है।
31 अगस्त को पटना में होगा एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि किसानों को खेती के लिए गुणवत्तायुक्त उर्वरक और बीज समय पर तथा आसानी से उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उर्वरक बिक्री व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए कृषि विभाग डिजिटल तकनीक का उपयोग कर रहा है।
उन्होंने बताया कि 31 अगस्त 2026 को कृषि भवन सभागार, मीठापुर, पटना में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विभाग के संबंधित अधिकारियों को नई व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
अधिकारियों को डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था की दी जाएगी जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को उर्वरक बिक्री की डिजिटल और फार्मर आईडी आधारित व्यवस्था के बारे में जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा उर्वरक की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के तरीकों पर भी चर्चा होगी।
कार्यक्रम में किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक और बीज आसानी से उपलब्ध कराने के लिए नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
FSAS के माध्यम से विकसित की गई ऑनलाइन व्यवस्था
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि उर्वरक बिक्री व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए Framework for Fertilizer Sale Application System यानी FSAS के माध्यम से ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की गई है।
इसके साथ ही iFMS और AgriStack के एकीकरण के जरिए उर्वरक की खरीद-बिक्री प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की व्यवस्था की गई है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से खाद की बिक्री और वितरण प्रक्रिया को बेहतर बनाना है।
पहले वैशाली और शेखपुरा में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
फार्मर आईडी के आधार पर उर्वरक बिक्री की शुरुआत बिहार में पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में वैशाली और शेखपुरा जिलों से की गई थी।
इन दोनों जिलों में व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन के बाद इसे आगे बढ़ाया गया। अब जहानाबाद, अरवल, शिवहर, लखीसराय और किशनगंज जिलों में भी फार्मर आईडी के आधार पर उर्वरक बिक्री व्यवस्था लागू की गई है।

सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, किसान हित में बड़ा कदम
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि खाद की बिक्री को डिजिटल बनाने का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव करना नहीं है। सरकार का लक्ष्य पूरी व्यवस्था को किसानों के हित में अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुविधाजनक बनाना है।
उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसानों को उनकी जरूरत के समय जरूरी कृषि इनपुट आसानी से मिल सकें और उन्हें खाद या बीज प्राप्त करने में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
आधुनिक और किसान-केंद्रित कृषि व्यवस्था पर जोर
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार के किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए कृषि व्यवस्था को अधिक स्मार्ट, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाना सरकार का संकल्प है। उर्वरक बिक्री की डिजिटल व्यवस्था इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ, गुणवत्तायुक्त बीज और खाद सुलभ कराओ’ अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों के खेतों को सुरक्षित रखना और उन्हें गुणवत्तायुक्त कृषि इनपुट समय पर उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को भी आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि किसानों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की सुविधा, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कृषि व्यवस्था को आधुनिक बनाना बिहार कृषि विभाग की प्राथमिकता है। सरकार का प्रयास है कि तकनीक के उपयोग से उर्वरक और बीज की उपलब्धता तथा वितरण व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए, जिससे किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त कृषि सामग्री आसानी से मिल सके।