कोसी से सत्ता के शिखर तक: बिजेंद्र प्रसाद यादव बने बिहार के डिप्टी सीएम

Bijendra Prasad Yadav Becomes Bihar’s Deputy CM

Amit Singh

बिहार की सियासत में चेहरे बदलते हैं, समीकरण बदलते हैं, लेकिन कुछ नाम समय की हर कसौटी पर खरे उतरते हैं। ऐसा ही एक नाम है बिजेंद्र प्रसाद यादव, जो पिछले साढ़े तीन दशकों से राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। नई सरकार के गठन के साथ ही उन्हें उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपना उनके लंबे, स्थिर और प्रभावशाली राजनीतिक सफर की बड़ी पहचान है।

सुपौल से सत्ता तक का सफर
कोसी क्षेत्र की राजनीति का पर्याय बन चुके बिजेंद्र यादव सुपौल से लगातार आठ बार विधायक चुने गए हैं। यह केवल जीत का आंकड़ा नहीं, बल्कि जनता के अटूट विश्वास की कहानी है। उनकी पहचान एक ऐसे नेता की रही है, जिन्होंने क्षेत्र के विकास को अपनी प्राथमिकता बनाया और उसे जमीन पर उतारा। 1974 के जेपी आंदोलन से राजनीति की शुरुआत करने वाले बिजेंद्र यादव छात्र जीवन से ही सक्रिय रहे। 1990 में पहली बार विधानसभा पहुंचने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लालू-राबड़ी सरकार में ऊर्जा राज्य मंत्री रहते हुए उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता का प्रभाव छोड़ा।

नीतीश कुमार के भरोसेमंद साथी
2005 में जब नीतीश कुमार ने बिहार की सत्ता संभाली, तब बिजेंद्र यादव जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष थे। उनकी संगठन क्षमता और नेतृत्व के प्रति निष्ठा ने उन्हें सरकार का एक अहम रणनीतिकार बना दिया। वे आज भी सत्ता और संगठन के बीच मजबूत कड़ी माने जाते हैं। 1990 से 2025 तक का उनका चुनावी रिकॉर्ड उन्हें बिहार के सबसे मजबूत नेताओं में शामिल करता है। उन्होंने हर राजनीतिक परिस्थिति में जीत दर्ज की और बड़े-बड़े दिग्गजों को मात दी। इसी वजह से कोसी क्षेत्र में उन्हें “विश्वकर्मा” के नाम से भी जाना जाता है।

ऊर्जा पुरुष से विकास के स्तंभ तक
बिजेंद्र यादव को बिहार का “ऊर्जा पुरुष” कहा जाता है। राज्य में बिजली सुधार और आधारभूत ढांचे के विस्तार में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है। अब बतौर डिप्टी सीएम, उनके कंधों पर पूरे बिहार के विकास की नई दिशा तय करने की जिम्मेदारी है। अनुभव और विश्वसनीयता की यह विरासत अब एक नई भूमिका में नजर आएगी। बिजेंद्र प्रसाद यादव का यह नया अवतार न सिर्फ सरकार को मजबूती देगा, बल्कि बिहार के विकास को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही कोसी से लेकर पूरे राज्य में उम्मीदों का एक नया दौर शुरू हो चुका है।

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