कारगिल विजय दिवस पर मातृभूमि के अमर रणबांकुरों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

Amit Singh
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NEWS PR डेस्क: दानापुर, 26 जुलाई। भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं का निर्वहन करते हुए प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाती है। यह दिवस उन अमर वीरों के अदम्य साहस, शौर्य, त्याग और सर्वोच्च बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर भारत की विजयगाथा को स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किया। कारगिल की दुर्गम एवं बर्फीली चोटियों पर लड़ी गई इस ऐतिहासिक विजय ने भारतीय सैनिकों की वीरता, अदम्य इच्छाशक्ति और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर बिहार रेजीमेंट केंद्र स्थित वीर स्मृति स्थल पर एक गरिमामय श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के दौरान कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर बिहार रेजीमेंट केंद्र के समादेष्टा ब्रिगेडियर राकेश कुमार बोरा ने कर्नल ऑफ द बिहार रेजीमेंट की ओर से वीर स्मृति स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी तथा राष्ट्र की रक्षा में उनके अद्वितीय साहस, बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया।

श्रद्धांजलि समारोह में समादेष्टा के साथ लेफ्टिनेंट कर्नल अभिषेक कुमार, लेफ्टीनेंट कर्नल अमित गुंजन, सूबेदार मेजर नारायण प्रधान, सूबेदार संजय सिंह, नायब सूबेदार सुजीत कुमार वर्मा सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) एवं सैनिक उपस्थित रहे। सभी उपस्थित सैन्य अधिकारियों एवं जवानों ने वीर स्मृति स्थल पर दो मिनट का मौन रखकर अमर शहीदों के प्रति अपनी कृतज्ञ श्रद्धांजलि अर्पित की।

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समारोह के दौरान सेना के बैंड द्वारा “वंदे मातरम्”, रेजीमेंटल धुनों तथा अन्य देशभक्ति गीतों की मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति और वीरता की भावना से ओत-प्रोत कर दिया। उपस्थित सभी सैनिकों ने देश की अखंडता, संप्रभुता एवं सुरक्षा के लिए सदैव समर्पित रहने तथा शहीदों के आदर्शों का अनुसरण करने का संकल्प दोहराया।

यह श्रद्धांजलि समारोह केवल वीर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को नमन करने का अवसर ही नहीं था, बल्कि भावी पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यपरायणता और मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देने का भी सशक्त माध्यम बना।

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