NEWS PR डेस्क : पटना हाईकोर्ट में इंटरनेट कनेक्टिविटी की खराब स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने गंभीर रुख अपनाया है। इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। याचिका में कहा गया है कि कोर्ट परिसर और कोर्ट रूम में हाई-स्पीड इंटरनेट और वाई-फाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता ओमप्रकाश कुमार ने दायर की है। याचिका में बताया गया है कि राजधानी के प्रमुख न्यायिक संस्थान पटना हाईकोर्ट में इंटरनेट की स्थिति बेहद खराब है, जिससे डिजिटल न्यायिक सेवाओं के संचालन में लगातार परेशानी आ रही है।
बीएसएनएल को बनाया जाएगा पक्षकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि अगली तारीख पर Bharat Sanchar Nigam Limited को भी मामले में पक्षकार बनाया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने हाईकोर्ट प्रशासन से यह जानकारी देने को कहा है कि अब तक इंटरनेट सुविधा सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या योजना है।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का दावा
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कोर्ट परिसर में निर्बाध इंटरनेट और वाई-फाई की कमी Article 14 of the Constitution of India और Article 21 of the Constitution of India के तहत मिलने वाले अधिकारों को प्रभावित करती है। उनका कहना है कि डिजिटल न्याय व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए ठोस और व्यापक नीति बनाना जरूरी है, ताकि वकीलों और वादियों को तकनीकी सुविधाओं का पूरा लाभ मिल सके।
ई-कोर्ट व्यवस्था पर पड़ रहा असर
याचिका में यह भी कहा गया कि एक ओर हाईकोर्ट ने ई-कोर्ट सिस्टम, ऑनलाइन कॉज लिस्ट, ई-फाइलिंग और वर्चुअल या हाइब्रिड सुनवाई जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं लागू की हैं, लेकिन दूसरी ओर कोर्ट रूम और गलियारों में इंटरनेट लगभग न के बराबर है। इसके कारण डिजिटल रिकॉर्ड तक पहुंचने और ई-फाइलिंग पोर्टल के इस्तेमाल में बार-बार रुकावट आती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य सरकार और हाईकोर्ट प्रशासन को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद स्थिति में सुधार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। लगातार खराब नेटवर्क के कारण वकीलों को रोजाना कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, अदालत के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही पटना हाईकोर्ट परिसर में इंटरनेट सुविधा को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे और डिजिटल न्यायिक कार्यों की रफ्तार तेज होगी।