मैं भी बंगाल की ही बेटी हूं… राष्ट्रपति मुर्मू क्यों भड़की? खुले मंच से ममता बनर्जी को खूब सुनाया

Asha Rai

NEWS PR डेस्क: सिलीगुड़ी में आयोजित नौवें अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों के विकास और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर चिंता व्यक्त की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद संथाल और अन्य आदिवासी समुदाय अभी भी विकास के लाभों से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर बंगाल में रहने वाले संथाल और अन्य आदिवासी समाज के लोग काफी मेहनती और प्रतिभाशाली हैं, लेकिन उन्हें विकास का वह लाभ नहीं मिल पाया है, जो मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंता का विषय है और प्रशासन को इस दिशा में गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

कार्यक्रम के आयोजन स्थल को लेकर भी राष्ट्रपति ने नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पहले प्रशासन ने एक बड़े मैदान में कार्यक्रम की अनुमति दी थी, लेकिन बाद में यह कहकर स्थान बदल दिया गया कि वहां जगह कम है। जबकि मौके पर पहुंचकर उन्होंने देखा कि उस मैदान में लाखों लोग आसानी से एकत्र हो सकते थे। राष्ट्रपति ने कहा कि शायद इसी वजह से संथाल समाज के अधिक लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बताया कि जब उन्हें लगा कि कार्यक्रम ऐसी जगह रखा गया है जहां अधिक लोग नहीं पहुंच पाएंगे, तो उन्होंने खुद लोगों के बीच जाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं यह देखने आई थीं कि वहां की वास्तविक स्थिति क्या है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उस इलाके में साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं पर और ध्यान देने की जरूरत है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने संथाल समाज की परंपराओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि संथाल समाज मुख्य रूप से साल (सखुआ) के वृक्ष की पूजा करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि उस क्षेत्र में अधिक से अधिक साल के पेड़ लगाए जाने चाहिए, ताकि समाज अपनी परंपराओं को बेहतर ढंग से निभा सके। उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी धर्मों, संस्कृतियों और प्रकृति का सम्मान किया जाता है।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि जब देश के राष्ट्रपति का किसी राज्य में दौरा होता है तो शिष्टाचार के तहत मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की मौजूदगी अपेक्षित होती है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कार्यक्रम में मौजूद नहीं थीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इससे कोई शिकायत नहीं है।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने भावुक अंदाज में कहा, “मैं भी बंगाल की ही बेटी हूं। ममता दीदी मेरी छोटी बहन जैसी हैं। पता नहीं वे किसी बात से नाराज हैं या क्या, लेकिन मुझे कोई गिला-शिकवा नहीं है। मेरी यही कामना है कि वे खुश रहें और आप सभी स्वस्थ व सुखी रहें।”

राष्ट्रपति ने लोगों से आपसी भाईचारे और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह देश केवल किसी एक समाज का नहीं, बल्कि आदिवासियों, गैर-आदिवासियों, हिंदी भाषियों, बंगालियों और गोरखाओं—सभी का है, और हम सबको मिल-जुलकर आगे बढ़ना है।

Share This Article