NEWS PR डेस्क: भारत सरकार की चिप्स टू स्टार्टअप्स (C2S) पहल के तहत देश ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत ने सेमीकंडक्टर डिजाइन में 85,000 इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के दस वर्षीय लक्ष्य की दिशा में केवल चार वर्षों में ही उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने कहा कि देशभर के 315 शैक्षणिक संस्थानों में विश्वस्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। ये उपकरण प्रमुख वैश्विक कंपनियों सिनोप्सिस, कैडेंस, सीमेंस, रेनेसा, एंसिस और एएमडी के सहयोग से प्रदान किए गए हैं। इन अत्याधुनिक टूल्स के माध्यम से छात्र सेमीकंडक्टर चिप्स के डिजाइन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि छात्रों द्वारा डिजाइन किए गए चिप्स का निर्माण और परीक्षण मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (SCL) में किया जा रहा है। इससे छात्रों को चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण तक की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।
यह कार्यक्रम अब दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-एक्सेस ईडीए कार्यक्रम बन गया है। अब तक इस पहल के तहत छात्रों द्वारा ईडीए उपकरणों का 1.85 करोड़ घंटे से अधिक उपयोग दर्ज किया जा चुका है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि असम से गुजरात और कश्मीर से कन्याकुमारी तक देशभर के संस्थानों के छात्र सेमीकंडक्टर डिजाइन से जुड़े प्रोजेक्ट्स में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह भारत की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में लगभग 800-900 अरब डॉलर का यह उद्योग भविष्य में बढ़कर 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। ऐसे में दुनिया भर में करीब 20 लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी, जिससे भारत के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
मंत्री ने यह भी घोषणा की कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत इस पहल का विस्तार करते हुए शैक्षणिक संस्थानों की संख्या 315 से बढ़ाकर 500 की जाएगी। इससे देश के हर राज्य में सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और परीक्षण में प्रशिक्षित प्रतिभाओं का मजबूत आधार तैयार किया जा सकेगा।
उन्होंने दोहराया कि भारत सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रतिभा विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और उद्योगों के साथ सहयोग के माध्यम से भारत का लक्ष्य वैश्विक सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभरना है।