NEWS PR डेस्क: सामरिक और आर्थिक दृष्टि से अहम कटिहार-जोगबनी रेलखंड के दोहरीकरण को रेल मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के तहत आने वाली 108 किलोमीटर लंबी इस सिंगल लाइन पर बढ़ते यात्री और मालगाड़ी दबाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। परियोजना की अनुमानित लागत 1799.82 करोड़ रुपये है और इसे चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
1909 से सिंगल लाइन रहे इस रेलखंड पर ट्रेनों की संख्या बढ़ने से क्रॉसिंग के लिए स्टेशनों पर लंबा इंतजार आम बात हो गई थी। दोहरीकरण के बाद 19 स्टेशनों पर निर्बाध आवाजाही संभव होगी। विपरीत दिशा से आने वाली ट्रेनों को बिना रुके गुजरने की सुविधा मिलेगी, जिससे समयपालन में सुधार, औसत गति में वृद्धि और कुल परिवहन क्षमता में कई गुना इजाफा होगा।
इससे कटिहार, पूर्णिया, अररिया, फारबिसगंज और पूरे सीमांचल क्षेत्र के साथ-साथ पूर्वी नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों को बड़ा लाभ मिलेगा। नई ट्रेनों के परिचालन का रास्ता भी साफ होगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
इसी कॉरिडोर में 129 किलोमीटर लंबे फारबिसगंज–सकरी रेलखंड के दोहरीकरण के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे हेतु 3.09 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही फारबिसगंज से लक्ष्मीपुर तक 17.60 किलोमीटर नई रेल लाइन निर्माण के लिए भी पहल की मांग की गई है, जिसका सर्वे पूरा हो चुका है।