10वीं में आए कम नंबर, लेकिन नहीं टूटा हौसला; गोपालगंज के अभिनव अशोक ने UPSC में पाई 247वीं रैंक

Asha Rai

NEWS PR डेस्क: बिहार के गोपालगंज जिले के रहने वाले अभिनव अशोक ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 247वीं रैंक हासिल कर अपने जिले और परिवार का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि वह पहले ही Union Public Service Commission (UPSC) की परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए चयनित हो चुके थे, लेकिन उनका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) बनना था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान भी पढ़ाई जारी रखी और दोबारा परीक्षा देकर यह उपलब्धि हासिल की।

साधारण परिवार से निकलकर हासिल की बड़ी सफलता

अभिनव अशोक की कहानी एक साधारण परिवार से शुरू होती है। बचपन में वह अन्य बच्चों की तरह खेलना, दोस्तों के साथ समय बिताना और पढ़ाई करना—इन सबके बीच संतुलन बनाकर चलते थे। उनका पढ़ने का तरीका भी अलग था। लंबे समय तक किताबों में डूबे रहने के बजाय वे नोट्स बनाकर विषयों को समझने पर ज्यादा भरोसा करते थे।

स्कूल के दिनों में एक समय ऐसा भी आया जब दसवीं की परीक्षा में उनके उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं आए। कई छात्र ऐसे मौके पर निराश हो जाते हैं, लेकिन अभिनव ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

पिता चाहते थे डॉक्टर, बेटे ने चुना प्रशासनिक सेवा का रास्ता

अभिनव के पिताडॉ. ए.के. चौधरी पेशे से चिकित्सक हैं और गोपालगंज के सदर अस्पताल में लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में वे जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उनकी मां पूनम चौधरी गृहिणी हैं।

पिता की इच्छा थी कि उनके दोनों बेटे डॉक्टर बनें और चिकित्सा सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाएं। लेकिन अभिनव ने प्रशासनिक सेवा में जाने का निर्णय लिया। बेटे के दृढ़ निश्चय को देखकर परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया।

आईपीएस बनने के बाद भी जारी रखी तैयारी

अभिनव अशोक ने पहली बार सिविल सेवा परीक्षा 2023-24 में दी थी। उस प्रयास में वे सफल होकर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए चयनित हो गए और हैदराबाद में प्रशिक्षण शुरू हो गया।

हालांकि उनका सपना आईएएस बनने का था, इसलिए उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान भी पढ़ाई जारी रखी। समय निकालकर तैयारी करते रहे और आखिरकार वर्ष 2025 की परीक्षा में 247वीं रैंक हासिल कर अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच गए। परिणाम घोषित होने के बाद सबसे पहले उन्होंने यह खुशखबरी अपने माता-पिता को दी।

असफलता से नहीं डरे, मेहनत से हासिल की मंजिल

अभिनव की सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। उनके पिता बेटे की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं, जबकि मां की आंखों में खुशी झलक रही है। परिवार का मानना है कि यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है।

आज अभिनव अशोक की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो कभी कम अंक आने या असफलता से निराश हो जाते हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो सफलता जरूर मिलती है।

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