बिहार पुलिस में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 32 वरिष्ठ IPS अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: पटना, 11 अप्रैल। बिहार में पुलिसिंग को और प्रभावी एवं जवाबदेह बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। डीजीपी Vinay Kumar ने राज्य के 32 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को अलग-अलग जिलों का प्रभारी और नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य जिलों में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और मुख्यालय से बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

पटना की जिम्मेदारी एडीजी नैय्यर हसनैन खां को

राजधानी पटना की सुरक्षा और निगरानी की कमान एडीजी Nayyar Hasnain Khan को सौंपी गई है। वे पहले पटना के एसएसपी और जोनल आईजी रह चुके हैं, जिससे उन्हें जिले की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों की अच्छी समझ है।

कई जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती

नई व्यवस्था के तहत गया की जिम्मेदारी एडीजी S Ravindran को दी गई है, जबकि मुजफ्फरपुर का प्रभार आईजी Sanjay Kumar को मिला है। सारण और बक्सर के लिए एडीजी Amit Kumar Jain को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसी तरह नालंदा के लिए एडीजी आर. मलार विजी, भोजपुर के लिए एडीजी पंकज कुमार दराद, दरभंगा के लिए एडीजी सुधांशु कुमार और भागलपुर के लिए आईजी एस. प्रेमलता को प्रभारी बनाया गया है।

सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों पर खास नजर

अन्य नियुक्तियों में एडीजी अमित लोढ़ा को लखीसराय और शेखपुरा, एडीजी संजय सिंह को सिवान और पूर्णिया, तथा एडीजी अजिताभ कुमार को गोपालगंज और खगड़िया की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लो को रोहतास और डीआईजी हरप्रीत कौर को भभुआ का प्रभार सौंपा गया है।

इसके अलावा वैशाली के लिए आईजी मनोज कुमार, मोतिहारी के लिए डीआईजी आनंद कुमार, बेगूसराय के लिए डीआईजी मीनू कुमारी और समस्तीपुर के लिए एडीजी कमल किशोर सिंह को जिम्मेदारी दी गई है।

पुलिसिंग में सुधार और सख्ती पर जोर

इस नई व्यवस्था के तहत अब वरिष्ठ अधिकारी सीधे जिलों की निगरानी करेंगे। थानों के कामकाज में सुधार, लंबित मामलों का निष्पादन, स्पीडी ट्रायल और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता होगी।

लापरवाह और बदनाम पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऐसे अधिकारियों को फील्ड ड्यूटी से हटाकर मुख्यालय भेजा जाएगा।

निरीक्षण और जवाबदेही बढ़ाने की पहल

बताया जा रहा है कि यह कदम निरीक्षण में हो रही देरी को दूर करने और पुलिस व्यवस्था को अधिक ‘पीपुल्स फ्रेंडली’ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। सीमावर्ती जिलों में घुसपैठ और नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण भी इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

कुल मिलाकर, इस बड़े फेरबदल से बिहार में पुलिसिंग व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे आम लोगों को बेहतर और त्वरित न्याय मिल सकेगा।

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