बिहार सहकारी नीति 2026 पर बड़ा मंथन, राम कृपाल यादव ने पैक्सों को आत्मनिर्भर बनाने पर दिया जोर

Rashmi Tiwari

पटना। बिहार राज्य सहकारी नीति 2026 के प्रभावी कार्यान्वयन तथा इसके अनुरूप बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम एवं नियमावली में आवश्यक संशोधनों के संबंध में आज सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव की अध्यक्षता में केन्द्रीय सहकारी बैंकों के अध्यक्षों, पैक्स अध्यक्षों एवं शीर्ष सहकारी समितियों के अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह तथा निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार रजनीश कुमार सिंह सहित विभागीय पदाधिकारी एवं सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक में विभागीय पदाधिकारियों द्वारा बिहार राज्य सहकारी नीति 2026 के प्रावधानों के आलोक में सहकारी अधिनियम, नियमावली एवं उपविधियों में आवश्यक संशोधन के लिए चिन्हित प्रमुख क्षेत्रों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसके साथ ही सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों से अन्य आवश्यक क्षेत्रों में संशोधन एवं सुधार के संबंध में सुझाव आमंत्रित किए गए।

बैठक में सहकारी समितियों की सदस्यता प्रक्रिया को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने तथा सदस्यता से संबंधित अपील की प्रक्रिया को सुगम करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक नियंत्रण एवं पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। सहकारी समितियों के बोर्ड के लोकतांत्रिक संचालन को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अधिनियम की धारा 41(5) में आवश्यक संशोधन पर भी विचार किया गया।

बैठक में सहकारी समितियों के कर्मचारियों से संबंधित विषयों पर भी महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए। कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा तथा नियमित वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था किए जाने, कर्मचारियों के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने तथा वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन में अनावश्यक विलंब अथवा उल्लंघन की स्थिति में आर्थिक दायित्व निर्धारित करने संबंधी प्रावधानों में आवश्यक संशोधन पर चर्चा की गई। साथ ही, समितियों के लाभ से एक विशेष तकनीकी विकास कोष के गठन तथा कमजोर सहकारी समितियों के पुनरुद्धार के लिए विशेष सहकारी संरचना/समिति के गठन की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में सहकारी समितियों के शीघ्र भंग होने से संबंधित वर्तमान प्रावधानों की भी समीक्षा की आवश्यकता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों द्वारा सुझाव दिया गया कि आधे से अधिक सदस्यों के त्यागपत्र देने की स्थिति में समिति के भंग होने संबंधी प्रावधान को आवश्यकतानुसार शिथिल किया जाए, ताकि कार्यशील एवं उपयोगी सहकारी समितियों का निरंतर संचालन सुनिश्चित किया जा सके। सहकारी समितियों, विशेषकर पैक्स के ससमय अंकेक्षण एवं निर्वाचन को सुनिश्चित करने तथा वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में प्रभावी दंडात्मक एवं आर्थिक प्रावधान किए जाने की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने उपस्थित प्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बिहार राज्य सहकारी नीति 2026 का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को अधिक मजबूत, लोकतांत्रिक, पारदर्शी, स्वायत्त एवं व्यावसायिक बनाना है। उन्होंने कहा कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिनियम, नियमावली एवं उपविधियों में जहां आवश्यक होगा, वहां नियमसंगत संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं की जमीनी आवश्यकताओं एवं प्रतिनिधियों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे सहकारी समितियां अपने सदस्यों के हित में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

मंत्री ने विशेष रूप से पैक्सों में व्यवसाय विविधीकरण एवं आय के नए स्रोत विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पैक्सों को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न आर्थिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता है। स्थानीय संसाधनों, कृषि उत्पादों एवं बाजार की संभावनाओं के अनुरूप नए उद्यमों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे पैक्स की आय में वृद्धि के साथ-साथ किसानों को भी उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य एवं विभिन्न सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकें।

इस क्रम में मंत्री द्वारा विभिन्न पैक्सों एवं सहकारी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे नवाचारी प्रयोगों एवं उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की गई। विशेष रूप से कैमूर जिले के दादर पैक्स द्वारा दादर नीर एवं सरसों तेल जैसे उत्पादों के निर्माण एवं विपणन की पहल को सराहनीय बताया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचारी प्रयास अन्य पैक्सों के लिए भी प्रेरणादायक हैं और सहकारी संस्थाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मंत्री ने कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से रोजगार, उद्यमिता एवं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की व्यापक संभावनाएं हैं। पैक्स एवं अन्य सहकारी संस्थाओं को उनकी स्थानीय आवश्यकताओं एवं क्षमताओं के अनुरूप नए उद्यमों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। इससे सहकारिता का लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण समुदाय तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

बैठक में बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रमेश चन्द्र चौबे, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक नालन्दा के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक पटना के अध्यक्ष रितेश कुमार, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक गयाजी के अध्यक्ष विनय कुमार, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक आरा के अध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक सिवान के अध्यक्ष मनोज सिंह, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक मुजफ्फरपुर के अध्यक्ष अमर नाथ पाण्डेय, हरित सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन संघ, पटना के अध्यक्ष मनोज कुमार तथा सोनापुर पैक्स एवं दादर पैक्स के अध्यक्ष सहित अन्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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