NEWS PR डेस्क: नई दिल्ली, 19 मार्च 2026: केंद्र सरकार ने देश में मत्स्य पालन और मछुआरों के कल्याण के लिए वर्ष 2015 से अब तक 39,272 करोड़ रुपये का निवेश किया है। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं ने इस क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी है।
इन योजनाओं में ब्लू रेवोल्यूशन योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि, प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना तथा किसान क्रेडिट कार्ड योजना शामिल हैं। इनका उद्देश्य मत्स्य उत्पादन, गुणवत्ता, तकनीक, बाजार व्यवस्था और मछुआरों की आय में सुधार करना है।
उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि
सरकार के प्रयासों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2024-25 में देश का कुल मत्स्य उत्पादन बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है, जबकि मत्स्य निर्यात 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्रति व्यक्ति मछली खपत 12-13 किलोग्राम तक बढ़ी है और जलीय कृषि उत्पादकता 4.7 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है। इन उपलब्धियों से मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
राज्यों में योजनाओं का विस्तार, तमिलनाडु को विशेष लाभ
तमिलनाडु सहित सभी राज्यों में इन योजनाओं का व्यापक क्रियान्वयन किया गया है। पिछले पांच वर्षों में 21,274.16 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिसमें केंद्र का अंश 9,189.74 करोड़ रुपये है। तमिलनाडु को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 1,156.16 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं।
राज्य में बहुउद्देश्यीय समुद्री शैवाल पार्क, मछली पकड़ने के बंदरगाहों का उन्नयन, एकीकृत मछली उतारने केंद्र, कृत्रिम रीफ, हैचरी, बायोफ्लॉक इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज जैसी कई परियोजनाएं स्थापित की गई हैं। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2024-25 तक तमिलनाडु का मत्स्य उत्पादन बढ़कर 9.48 लाख टन हो गया है।
मछुआरों को वित्तीय और तकनीकी सहायता
सरकार ने मछुआरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना का दायरा भी बढ़ाया है। पिछले तीन वर्षों में 5,01,848 केसीसी कार्ड जारी किए गए, जिनमें से 2,59,947 तमिलनाडु में वितरित किए गए।
इसके अलावा, आधुनिक तकनीक, शीत श्रृंखला, परिवहन, विपणन और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे मछली उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों में सुधार हुआ है।
बीमा और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
मछुआरों की सुरक्षा के लिए समूह दुर्घटना बीमा योजना लागू की गई है, जिसके तहत मृत्यु या पूर्ण विकलांगता पर 5 लाख रुपये, आंशिक विकलांगता पर 2.5 लाख रुपये और अस्पताल खर्च के लिए 25 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। इस योजना के तहत पिछले चार वर्षों में हर साल औसतन 34.49 लाख मछुआरों को बीमा कवर मिला है।