NEET छात्रा केस में बड़ा मोड़: CBI चार्जशीट नहीं दे पाई, आरोपी को जमानत

Major twist in NEET student case

Neha Nanhe
- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

पटना के बहुचर्चित NEET छात्रा रेप और मौत मामले में गुरुवार को एक अहम कानूनी मोड़ आया। शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को पटना सिविल कोर्ट ने डिफॉल्ट बेल दे दी है। यह जमानत केस के तथ्यों या सबूतों के आधार पर नहीं, बल्कि जांच एजेंसी द्वारा तय समय सीमा में चार्जशीट दाखिल न करने की वजह से मिली है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक NEET छात्रा के साथ कथित रेप और उसकी मौत से जुड़ा है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसी CBI को सौंपी गई थी। अदालत ने 10 अप्रैल 2026 को स्पष्ट निर्देश दिया था कि 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाए। आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत यह समय सीमा अनिवार्य होती है लेकिन तय समय में चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर आरोपी को “डिफॉल्ट बेल” का कानूनी अधिकार मिल जाता है। इसी तकनीकी आधार पर मनीष रंजन को जमानत दी गई।
अदालत ने इस मामले में लापरवाही को गंभीर माना
हालांकि, गुरुवार को बेल बॉन्ड दाखिल नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, यह प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो सकती है, जिसके बाद आरोपी की रिहाई संभव है। अदालत ने इस मामले में लापरवाही को गंभीर माना है। जांच अधिकारी (IO) के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की गई है, कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ऐसी चूक न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती है।
आगे सबूतों के आधार पर फैसला होगा
यह जमानत केवल तकनीकी आधार पर दी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी को दोषमुक्त माना गया है। केस की सुनवाई जारी रहेगी और आगे सबूतों के आधार पर फैसला होगा। पीड़ित परिवार और उनके समर्थक इस फैसले से निराश जरूर हैं, लेकिन उनका कहना है कि वे न्याय की लड़ाई अंत तक लड़ेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जांच एजेंसी CBI की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अदालत परिसर में अधिकारियों का संतुलित रवैया भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →
Share This Article