मोबाइल क्वालिटी कंट्रोल वैन से बदलेगी हाईवे मॉनिटरिंग की तस्वीर

Amit Singh
- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

NEWS PR डेस्क: देश में तेज़ी से बढ़ रहे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के बीच अब फोकस केवल सड़कों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, सुरक्षा और टिकाऊपन सुनिश्चित करने पर है। इसी दिशा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक प्रायोगिक परियोजना शुरू की है, जिसके तहत मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन (MQCV) के जरिए निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्गों की ऑन-साइट जांच की जा रही है। यह पायलट परियोजना फिलहाल राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और ओडिशा में लागू की गई है।

चलती-फिरती प्रयोगशाला: सड़क पर ही गुणवत्ता जांच

मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन को एक “चलती-फिरती लैब” के रूप में डिजाइन किया गया है। इनमें एडवांस्ड नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT) उपकरण लगाए गए हैं, जो निर्माण कार्य को बाधित किए बिना गुणवत्ता की जांच करते हैं।

मुख्य उपकरणों में शामिल हैं:

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

रिबाउंड हैमर: कंक्रीट की सतह की कठोरता और मजबूती का अनुमान लगाने के लिए।

अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी मीटर: कंक्रीट के भीतर छिपी दरारों या खाली स्थानों का पता लगाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग।

एस्फाल्ट डेंसिटी गेज : सड़क की सतह पर एस्फाल्ट की सघनता और टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए।

लाइट-वेट डिफ्लेक्टोमीटर : मिट्टी और सब-बेस की स्थिरता का आकलन।

रिफ्लेक्टोमीटर: सड़क संकेतों और मार्किंग की दृश्यता की जांच, ताकि दिन-रात वाहन चालकों को स्पष्टता मिले।

इन तकनीकों के जरिए गुणवत्ता नियंत्रण को प्रतिक्रियात्मक प्रक्रिया से बदलकर एक सक्रिय, डेटा-आधारित निगरानी प्रणाली में बदला जा रहा है।

रियल-टाइम मॉनिटरिंग और पारदर्शिता

मंत्रालय परीक्षण के निष्कर्षों को अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ साझा करेगा। यदि किसी परियोजना में गुणवत्ता संबंधी कमी पाई जाती है, तो तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा, मंत्रालय एक राष्ट्रीय राजमार्ग गुणवत्ता निगरानी पोर्टल विकसित कर रहा है, जहां मोबाइल वैन से तैयार रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। पोर्टल में वैन की रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग भी होगी, जिससे निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।

11 और राज्यों में होगा विस्तार

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद मंत्रालय ने अगले चरण में 11 राज्यों में इस प्रणाली को लागू करने की योजना बनाई है। इनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम और मेघालय शामिल हैं। अगले चरण के लिए निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी हैं और जून 2026 तक इन वैन के संचालन में आने की उम्मीद है।

गुणवत्ता पर फोकस, जवाबदेही के साथ विकास

सरकार का उद्देश्य साफ है भारत के राजमार्ग सिर्फ तेजी से न बनें, बल्कि वे विश्वस्तरीय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरें। मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन के जरिए अब सड़कें “वादों” से नहीं, बल्कि ठोस डेटा, परीक्षण और पारदर्शिता से अपनी मजबूती साबित करेंगी।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →
Share This Article