मधुबनी में एनडीए की तूफ़ानी वापसी, झंझारपुर में मिश्रा का प्रचंड जनादेश

Jyoti Sinha
- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

मधुबनी की राजनीति ने इस बार नया इतिहास रचा है। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए का दबदबा इतना प्रबल रहा कि जिले की 10 में से 9 सीटें कमल और तीर के पक्ष में चली गईं। सिर्फ एक सीट महागठबंधन के खाते में पहुँची।

लेकिन सबसे चर्चित कहानी झंझारपुर से निकली, जहाँ भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा ने ऐसी प्रचंड जीत दर्ज की, जिसने पूरी राजनीतिक परिदृश्य को चौंका दिया।

झंझारपुर की इस चुनावी जंग में उन्होंने सीपीआई उम्मीदवार रामनारायण यादव को 54,849 मतों के विस्मयकारी अंतर से मात दी—यह अन्तर न सिर्फ जिले में, बल्कि पूरे उत्तर बिहार में सबसे बड़ा रहा। यह परिणाम साफ दिखाता है कि जनता का भरोसा किस ओर झुक रहा है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →

लगातार दूसरी बार और कुल पाँचवी बार विधानसभा पहुँच रहे नीतीश मिश्रा की सफलता ने यह प्रमाणित कर दिया है कि झंझारपुर में उनकी आधारशिला सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में बनी है।

जीत के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उनका अंदाज़ विनम्र, मगर बेहद भावनात्मक था। उन्होंने कहा—
“यह विजय झंझारपुर की जनता को समर्पित है। मेरा हर क्षण, हर प्रयास इस धरती के नाम है। मैं खुद को झंझारपुर परिवार का पाँचवाँ सदस्य मानता हूँ—चाहे परिवार में चार ही लोग क्यों न हों।”

उनके ये शब्द उस गहरे लगाव को दर्शाते हैं, जो वर्षों की सेवा, सक्रियता और विश्वास से विकसित हुआ है। अपनी भावनाओं को सँभालते हुए उन्होंने आगे कहा—
“इतने भारी मतों से जीत… मैं आभारी हूँ। यह आशीर्वाद ही नहीं, मेरे लिए वरदान है।”

मधुबनी के मतदाताओं ने इस चुनाव में स्पष्ट संकेत दिया कि वे सब देखते हैं, सब समझते हैं और सही समय पर अपनी बात मतपेटी में दर्ज कर देते हैं।

नीतीश मिश्रा की इस ऐतिहासिक जीत पर डीएवी कॉलेज, सीवान के अर्थशास्त्र विभाग के अवकाशप्राप्त विभागाध्यक्ष डॉ. रामानंद पाण्डेय ने भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि नीतीश मिश्रा ने अपने कार्यों से जनता का विश्वास जीत लिया है। वे अपने पिता, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र के अधूरे विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में निरंतर जुटे हुए हैं।

डॉ. पाण्डेय ने कहा कि जनप्रतिनिधि और जनता के बीच भरोसे की ऐसी मिसाल कम ही देखने को मिलती है, और नीतीश मिश्रा की यह अद्वितीय जीत झंझारपुर के राजनीतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गई है।

- Advertisements -
Your Brand Here
Limited time offer
Advertise Now →
Share This Article