‘एक देश-एक शिक्षा बोर्ड’ की जरूरत: डॉ. संतोष सुमन ने प्रधानमंत्री से की पहल की मांग

Amit Singh

NEWS PR डेस्क: पटना, 4 अप्रैल। हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने देश में समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए “एक देश–एक शिक्षा बोर्ड” की दिशा में ठोस पहल की मांग की है।

डॉ. सुमन ने कहा कि “राष्ट्रपति का बेटा हो या भंगी की संतान, सबको शिक्षा एक समान”- यह सिद्धांत ही सच्चे लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि इस मूल भावना को व्यवहार में उतारने के लिए अब निर्णायक कदम उठाने का समय आ गया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में विभिन्न शिक्षा बोर्डों की अलग-अलग व्यवस्था के कारण विद्यार्थियों के बीच अवसर, पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणाली में व्यापक असमानता देखने को मिलती है। यह न केवल प्रतिभा के विकास में बाधा बनती है, बल्कि समतामूलक और सशक्त भारत के निर्माण के लक्ष्य को भी कमजोर करती है।

डॉ. सुमन ने यह भी कहा कि भाषा, क्षेत्रवाद और धर्म के आधार पर बंटी हुई शिक्षा व्यवस्था समाज में असंतुलन पैदा कर रही है। साथ ही, शुरुआती नीतिगत खामियों के कारण शिक्षा के क्षेत्र में गरीब और अमीर के बीच गहरी खाई बन गई है, जो आज एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने है।

उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे देश में एक समान पाठ्यक्रम, पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए “एक देश-एक शिक्षा बोर्ड” लागू किया जाना चाहिए। इससे शिक्षा के क्षेत्र में वास्तविक समानता स्थापित की जा सकेगी।

डॉ. सुमन ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि शिक्षा को केंद्र के अधीन एक समन्वित व्यवस्था के रूप में विकसित करते हुए देश के हर छात्र को समान अवसर प्रदान करने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस दिशा में उठाया गया कदम देश में शिक्षा सुधार के नए युग की शुरुआत करेगा।

उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार, संबंधित मंत्रालय और सभी सहयोगी दल इस विषय पर सकारात्मक पहल करेंगे।

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